विसरण किसे कहते है What is Diffusion in Hindi very easy

नमस्कार दोस्त आज हम बात करने वाले है कि विसरण किसे कहते हैं? (What is Diffusion in Hindi?)

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और इसकी क्या उपयोगिता है, परासरण किसे कहते है, परासरण के प्रकार, परासरण की उपयोगिता, रसारोहण, डिक्सन और जाली का ससंजनवाद और भी जानकारियां दी गई है तो चलिए पढ़ते है  

विसरण और परासरण किसे कहते है?

दोस्त क्या आप जानना चाहते है कि विसरण और परासरण क्या है यदि हाँ तो आप बिलकुल सही पोस्ट पर आये है दोस्त इसमें हम विसरण किसे कहते हैं? और परासरण किसे कहते है? इसके अलावा इससे सम्बंधित और भी जानकारियां दिए है तो आप इसे स्टेप बाई स्टेप पढ़िये जिससे आपको इसके बारे में अच्छी तरह से समझ में आ जाए तो चलिए शुरू करते है

विसरण किसे कहते हैं? (What is Diffusion in Hindi)

ठोस, द्रव या गैसों के अणुओं या आयनों का उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता की ओर प्रवाह ही विसरण कहलाता है

Meaning of Diffusion in Hindi?

Diffusion को हिंदी में विसरण कहते है   

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विसरण की उपयोगिता –
  • विसरण क्रिया के द्वारा ही प्रकाश संश्लेषण के दौरान पौधे से निकलने वाली ऑक्सीजन स्टोमेटा से होती हुई बाह्य वातावरण में विसरित हो जाती है क्योकि पौधों के अन्दर ऑक्सीजन की सांद्रता बाह्य वायुमंडल के अपेक्षा अधिक होती है
  • विसरण वाष्पोत्सर्जन क्रिया में सहायक है क्योंकि पत्तियों में अंतराकोशकीय स्थानों में उपस्थित जल के अणु विसरण क्रिया द्वारा ही पत्तियों के स्टोमेटा से वाष्प के रूप में उड़ा दिए जाते है
  • विसरण बीजो के अंकुरण में सहायक होते है

परासरण किसे कहते है? (What is Osmosis in Hindi)

एक अर्द्धपारगम्य झिल्ली से होकर अणुओं का प्रवाह जो निम्न सांद्रता से उच्च सांद्रता की ओर होता है परासरण कहलाता है परासरण में विलायक के अणु का प्रवाह ही होता है परासरण निम्लिखित दो प्रकार का होता है

  1. अन्तः परासरण (Endosmosis in Hindi)
  2. बहिः परासरण (Exosmosis in Hindi)

अन्तः परासरण किसे कहते है?

विलायक के अणुओं का कोशिका की तरफ का प्रवाह अन्तः परासरण कहलाता है

जैसे – किसमिस का जल में फूल कर बड़ा हो जाना अन्तः परासरण के कारण होता है

बहिः परासरण किसे कहते है?

बहिः परासरण वह क्रिया है जिसमे अणुओं का प्रवाह कोशिका के अन्दर से बाहर की तरफ होता है

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जैसे – नमक के गाढ़े घोल में अंगूर का पिचक जाना है

परासरण की उपयोगिता –

  • जड़ो द्वारा जल के अवशोषण में
  • बीजो के अंकुरण में
  • पौधों के शरीर में, जल खनिज लवण एवं पोषक पदार्थो के प्रवाह में
  • पौधों में स्फीतिदाब उत्पन्न करके पत्तियों के स्टोमेटा को खुलने व बंद करने में
जड़ द्वारा जल का अवशोषण –

पौधों की जड़े मिट्टी के कणों के बीच बहुत गहराई तक फैली होती है मिट्टी के कणों के बीच उपस्थित केशकीय जल का परासरण दाब लगभग 1 ATM होता है जबकि जड़ो के मूल रोमो में उपस्थित कोशिका द्रव्य का परासरणी दाब 3-8 ATM होता है अतः मूल रोमो में उच्च परासरण दाब के कारण मिट्टी के कणों से जल के अणु प्रवेश करने लगते है जल के अणुओं के मूल रोमो में प्रवेश करते ही इनका परासरणी दाब घट जाता है

जिसके फलस्वरूप चूसड़ दाब (SP) एवं DPD भी घट जाता है किन्तु उनका स्फीतिदाब (Turger Pressure) बढ़ जाता है इसी प्रकार मूलरोमो से सटी हुई एपिडर्मिस कोशिका का परासरणी दाब (OP) मूलरोमो की अपेक्षा ज्यादा होता है जिसके फलस्वरूप जल के अणु एपिडर्मिस कोशिका में प्रवेश कर जाते है जल के अणुओं के प्रवेश करते ही इनका परासरण दाब घट जाता है इसके फलस्वरूप इसका SP और DPD भी घट जाता है

किन्तु इनका TP बढ़ जाता है अब इसी प्रकार एपिडर्मिस से सटी हुई कार्टेक्स कोशिका का परासरणी दाब एपिडर्मिस कोशिका से ज्यादा होता है अतः जल के अणु एपिडर्मिस से कार्टेक्स कोशिका में प्रवेश करते है जिसके फलस्वरूप इसका भी SP, DPD,OP घट जाता है किन्तु TP बढ़ जाता है और इस प्रकार जल के अणु कार्टेक्स के एक से दूसरी कोशिका और दूसरी कोशिका से तीसरी कोशिका होते हुए अंततः इन्डोडर्मिस तक पहुच जाते है

इंडोडर्मिस में एक स्थान पर कोशिका भित्ति बहुत पतली होती है कैस्पेरियन पट्टी कहा जाता है और जल के अणु इसी स्थान से होकर अंततः जाइलेम वाहिकाओ तक पहुच जाते है और यहाँ से इन्हें पत्तियों तक पहुँच करके वाष्पोत्सर्जन क्रिया द्वारा बाहर निकाल लिया जाता है

रसारोहण (Ascent of Sap) –

       जल का जाइलेम वाहिकाओ द्वारा गुरुत्वाकर्षण के विपरीत पौधों में ऊपर की तरफ चढ़ना अर्थात जड़ से लेकर पत्तियों तक पहुंचना रसारोहण कहलाता है

       पौधों में रसारोहण की क्रिया को समझने के लिए विभिन्न बैज्ञानिको द्वारा तरह – तरह के सिद्धांत प्रस्तुत किये गये जिनमे से डिक्सन एवं जाली का ससंजन बल सर्वमान्य है

चलो अब जान लेते है कि डिक्सन और जाली का ससंजनवाद क्या है?

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डिक्सन और जाली का ससंजनवाद –

                           पौधों में रसारोहण की क्रिया को समझाने के लिए बैज्ञानिक डिक्सन और जाली द्वारा प्रस्तुत इस सिद्धांत के अनुसार जल के अणु आपस में एक दूसरे से ससंजन बलों द्वारा बंधे होते है और इसी ससंजन बल के ही कारण जैसे ही जल का कोई अणु परासरण क्रिया द्वारा मूलरोम में प्रवेश करता है तो एपिडर्मिस, कार्टेक्स, इंडोडर्मिस से होते हुए जाइलेम वाहिकाओ द्वारा पत्तियों तक पहुँचता है वैसे ही वह अणु अपने आस – पास के अन्य अणुओं लप भी अपने साथ रसारोहण के लिए प्रेरित करता है और एक के बाद दूसरा, दूसरे के बाद तीसरा और तीसरे के बाद चौथा अणु दूसरे का स्थान लेते रहते है

और इस प्रकार जड़ से लेकर पत्तियों तक एक श्रृंखला बन जाती है और पत्तियों में वाष्पोत्सर्जन क्रिया द्वारा जैसे ही जल का कोई अणु अपना स्थान छोड़कर बाहर जाता है उसके बगल स्थित दूसरा अणु उसका स्थान ले लेता है और यही क्रिया पत्तियों तक जारी रहती है और जल के अणु जड़ो से होते हुए पत्तियों तक पहुंचते रहते है

दोस्तों आशा करता हूँ कि आपको विसरण किसे कहते हैं? (What is Diffusion in Hindi?) के बारे में दी गई जानकारी पसंद आई होगी अगर दोस्त यह दी गई जानकारी आपको पसंद आई है तो प्लीज इसे अधिक से अधिक शेयर कीजिये

धन्यवाद

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