फैराडे का नियम, प्रथम नियम, द्वितीय नियम, आसान भाषा में

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका एक और नए आर्टिकल में जिसमे हम लोग बात करेंगे कि “फैराडे का नियम क्या है?” इस नियम के बारें में अच्छी तरह से जानेगे तो चलिए समय बर्बाद न करते हुए शुरू करते है।

फैराडे का नियम क्या है? (What is Faraday’s law?)

विद्दुत – अपघटन के फैराडे का नियम (Faraday’s Laws of Electrolysis)–

माइकेल फैराडे ने विद्दुत अपघटन पर अनेक प्रयोग किये तथा मिले हुए परिणामो को दो नियमो द्वारा प्रस्तुत किया। इन नियमो को विद्दुत अपघटन संबधी फैराडे का नियम कहा जाता है। ये नियम निम्नलिखित है।

फैराडे का नियम, faraday's law in hindi
फैराडे का नियम

विद्दुत – अपघटन का फैराडे का प्रथम नियम (Faraday’s first law of electrolysis) –

किसी भी इलेक्ट्रोड पर निक्षेपित अथवा विमुक्त किसी पदार्थ की मात्रा विद्दुत – अपघटनी विलयन में प्रवाहित विद्दुत के मात्रा के अनुक्रमानुपाती होती है।

       अतः यदि m ग्राम पदार्थ विद्दुत के Q कूलाम प्रवाहित करने पर निक्षेपित होते है। तब

             m  Q अथवा m = ZQ

जहाँ Z अनुक्रमानुपाती नियतांक है तथा विद्दुत – रासायनिक तुल्यांक कहलाता है। यदि I एम्पियर विद्दुत धारा को t सेकंड तक प्रवाहित किया जाए तो –

       Q = I × t

इस प्रकार, m = Z × Q = Z × I × t

अब यदि Q = 1C अथवा I = 1 एम्पियर तथा t = 1 सेकंड, तब

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             m = Z के साथ 1 एम्पियर और एक सेकंड से गुणा करने पर

या            m = Z

अतः किसी पदार्थ का निक्षेपित द्रव्यमान, जबकि एक एम्पियर धारा एक सेकंड तक प्रवाहित की जाए अर्थात एक कूलाम विद्दुत की मात्रा प्रवाहित की जाए, पदार्थ का विद्दुत – रासायनिक तुल्यांक कहलाता है।

(2) विद्दुत – अपघटन का फैराडे का द्वितीय नियम (Faraday’s second law of electrolysis) –

       इसके अनुसार जब विद्दुत की समान मात्रा को श्रेणीक्रम में संयोजित विभिन्न विद्दुत अपघटनी विलयनो में से गुजारा जाता है। तब एलेक्ट्रोडो पर उत्पन्न पदार्थो के भार उनके रासायनिक तुल्यांक – भारों के अनुक्रमानुपाती होते है।

उदाहरण – जब समान विद्दुत धारा दो विद्दुत – अपघटनी विलयनो; जैसे – श्रेणीक्रम में संयोजित कॉपर सल्फेट (CuSO4) तथा सिल्वर नाइट्रेट (AgNO3) में प्रवाहित की जाती है। तब निक्षेपित कॉपर तथा सिल्वर के भार इस प्रकार होंगे –

       निक्षेपित कॉपर का भार / निक्षेपित सिल्वर का भार = कॉपर का तुल्यांक भार / सिल्वर का तुल्यांक तुल्यांक भार।

यद्दपि आधुनिक पदों में तुल्यांक – भार पद का प्रयोग नही किया जाता है। किसी विद्दुत रासायनिक परिवर्तन के दौरान विनियमित इलेक्ट्रानो के मोलो के पदों में फैराडे के विद्दुत अपघटनी नियम को इस तरह भी लिखा जा सकता है –

“निक्षेपित अथवा विमुक्त हुए पदार्थ के मोल अर्थात होने वाले रासायनिक परिवर्तन की मात्रा ऑक्सीकरण – अपचयन (Oxidation and Reduction) अभिक्रियाओ के दौरान विनियमित इलेक्ट्रानो के मोलों की संख्या के समानुपाती होती है।”

इस प्रकार प्रवाहित की जाने वाली विद्दुत की मात्रा ज्ञात होने पर हम किसी उचित इलेक्ट्रोड अभिक्रिया से बने उत्पाद के मोलो की संख्या ज्ञात कर सकते है। उत्पादों के मोलों की संख्या ज्ञात होने पर हम उनके द्रव्यमान अथवा गैसीय अवस्था में आयतन ज्ञात कर सकते है।

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विद्दुत – अपघट्य के विलयन की चालकता (Conductivity of the solution of an electrolyte) –

यह प्रतिरोध R का व्युत्क्रम होता है। तथा उस सरल रूप से परिभाषित किया जा सकता है जिससे धारा किसी चालक से प्रवाहित होती है।

c = 1/R = A/ p(rho) l       (चूँकि R = pl/ A)

k = 1/p = 1/R × l/A

यहाँ k विशिष्ट चालकत्व है।

चालकता का SI मात्रक सिमेंज (Siemens) है। जिसे ‘S’ से निरुपित किया जाता है तथा यह ओम-1 के तुल्य होता है।

मोलर चालकता (Molar conductivity) –

वह चालकता जो 1 मोल विद्दुत – अपघट्य को विलयन में घोलने पर समस्त आयनों द्वारा दर्शाई जाती है। मोलर चालकता कहलाती है, इसे लैम्ब्डा m से व्यक्त किया जाता है। यदि विद्दुत – अपघट्य विलयन के V सेमी3 में विद्दुत – अपघट्य के 1 मोल हों, तब

       लैम्ब्डा m = k × V

              = k × 1000 / मोलरता

              = k × 1000 / M

इसकी इकाई ओम-1 सेमी2 मोल-1 या सीमेंज सेमी2 मोल-1 है।    

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