ऑक्सीकरण संख्या, अपचयन, नियम, विधि, अंतर, संयोजकता, उदाहरण

नमस्कार दोस्तों, आज हम इस आर्टिकल ऑक्सीकरण संख्या के बारे में बात करेंगे और इसके बारे में अच्छी तरह से जानेंगे तो चलिए देर न करते हुए शुरू करते है।

ऑक्सीकरण तथा अपचयन (Oxidation and Reduction) –

किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में घटित होने वाली ऑक्सीकरण तथा अपचयन दो प्रमुख घटनाये है। जिनकी व्याख्या निम्नलिखित अविधारणा के अनुसार किया जाता है।

प्राचीन अविधारणा (Old Concept) –

प्राचीन अविधारणा के अनुसार जब किसी रासायनिक अभिक्रिया में हाइड्रोजन धन विद्दुतीय तत्व धातु जुड़ते है अथवा ऑक्सीजन ऋणविद्दुतीय तत्व तथा अधातु निकलते है, तो ऐसी ही प्रक्रिया को अपचयन कहा जाता है।

उदाहरण –

      C + 2H2 ————- CH4 (अपचयन)

जब किसी रासायनिक अभिक्रिया में ऑक्सीजन परमाणु ऋण विद्दुतीय तत्व तथा अधातुए जुड़ते है अथवा हाइड्रोजन परमाणु धनविद्दुतीय तत्व तथा धातु निकलते है तो ऐसी ही रासायनिक अभिक्रिया को ऑक्सीकरण कहा जाता है।

जैसे –

C + O2 ———– CO2 (ऑक्सीकरण)

“ प्राचीन अविधारणा आगे चलकर असफल हो जाती है परन्तु कार्बनिक रसायन (Organic Chemistry) में ऑक्सीकरण तथा अपचयन का अध्ययन प्राचीन अविधारणा से किया जाता है।

जैसे –

एल्कोहल, एल्डिहाइड या कीटोन अम्ल या एस्टर

R-CH2-OH ———- R-CHO ———- R-COOH (ऑक्सीकरण)

2- इलेक्ट्रानिक अविधारणा (Electronic Concept) –

इलेक्ट्रानिक सिधांत के अनुसार किसी अणु परमाणु अथवा आयन द्वारा एक अथवा एक से अधिक इलेक्ट्रान ग्रहण अथवा त्यागने की प्रक्रिया को ऑक्सीकरण अथवा उपचयन कहा जाता है।

ऑक्सीकरण प्रक्रिया में किसी तत्व की संयोजकता में वृद्धि होती है। संयोजकता में हुई यह वृद्धि त्यागे गए इलेक्ट्रानो के संख्या के बराबर होता है।

Na ————- Na+ + 1e-

Cu ————- Cu+2 + 2e-

Zn ———— Zn+2 + 2e-

Fe ————- Fe+3 + 3e-

ऑक्सीकरण प्रक्रिया में क्योकि इलेक्ट्रान त्यागे जाते है इसलिए इस प्रक्रिया को इलेक्ट्रान का निकलना या De – Electronation कहलाता है।

इलेक्ट्रानिक सिधांत के अनुसार किसी अणु परमाणु अथवा एक या एक से अधिक इलेक्ट्रान ग्रहण करने की प्रक्रिया को ही अपचयन या अवकरण कहा जाता है। अपचयन प्रक्रिया में किसी तत्व की संयोजकता में कमी होती है। संयोजकता में हुई यह कमी ग्रहण किये गये इलेक्ट्रानो की संख्या के बराबर होता है।

Cl2 + 2e- ——— 2Cl

Sn+4 + 2e- ——– Sn+2

Fe+3 + 1e- ——— Fe+2

अपचयन प्रक्रिया में क्योंकि इलेक्ट्रान ग्रहण किये जाते है इसलिए इस प्रक्रिया को Electronation कहा जाता है।

ऑक्सीकरण संख्या

ऑक्सीकरण संख्या विधि (Oxidation Number Method) –

ऑक्सीकरण संख्या संकल्पना के अनुसार जब किसी तत्व की ऑक्सीकरण संख्या में वृद्धि होती है तो इस प्रक्रिया को ही ऑक्सीकरण कहा जाता है।

H2S-2 + ऑक्सीकारक ——– S0

Sn+2Cl2 ———– Sn+4Cl4

ऑक्सीकरण संख्या संकल्पना के अनुसार अपचयन वह प्रक्रिया है जिसमे किसी तत्व की ऑक्सीकरण संख्या में कमी होती है।

(पोटैशियम पर्मैग्नेट) KMn+7O4 + H+ ——- Mn+2

(पोटैशियम क्लोरेट) KClO3 ——– KCl

ऑक्सीकरण संख्या (Oxidation Number) –

किसी निश्चित यौगिक में किसी तत्व की ऑक्सीकरण संख्या उस तत्व के मुक्त अवस्था से यौगिक अवस्था में जाने में ग्रहण किये गये अथवा त्यागे गये इलेक्ट्रानो की संख्या के बराबर होता है।

ऑक्सीकरण संख्या और संयोजकता में अंतर

ऑक्सीकरण संख्या (Oxidation Number) संयोजकता (Valency)
आवेश की वह मात्रा जो किसी तत्व के परमाणु पर स्थित होता है ऑक्सीकरण संख्या कहलाता है। किसी तत्व के परमाणु द्वारा दूसरे परमाणु के साथ बनाये गये बंधो की संख्या ही उस तत्व की संयोजकता कहलाती है।
किसी तत्व की ऑक्सीकरण संख्या धनात्मक, ऋणात्मक तथा शून्य कुछ भी हो सकती है जैसे – NH3 में नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण संख्या -3 तथा Nacl में Na की ऑक्सीकरण संख्या +1 होती है। किसी तत्व की संयोजकता न तो धनात्मक होती है न ही ऋणात्मक होती है। जैसे – PH3 में P की संयोजकता 3 होती है तथा CH4 में C की संयोजकता 4 होती है।
भिन्न – भिन्न यौगिको में एक ही तत्व की ऑक्सीकरण संख्या भिन्न – भिन्न होती है। जैसे – CH4 , CH3Cl, CH2Cl2, CHCl3, CCl4 में क्रमशः C की ऑक्सीकरण संख्या -4, -2, 0, +2, +4 होती है। भिन्न – भिन्न यौगिको में एक तत्व की संयोजकता एक समान होती है। जैसे – CH4 , CH3Cl, CH2Cl2, CHCl3, CCl4 में C की संयोजकता 4 होती है।
ऑक्सीकरण संख्या के लिए नियम (Rule’s for Oxidation Number) –

किसी तत्व की ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात करने के लिए निम्न नियम प्रस्तुत है

Rule 1 – उदासीन यौगिक की ऑक्सीकरण संख्या शून्य होती है। जैसे – CO, CO2, NO (नाइट्रोसिल) NH3, H2O, C2H2, C2H4

C5H5N = पिरिडीन = Py

Rule 2 – जब दो विद्दुत ऋणात्मकता वाले तत्व आपस में जुड़े होते है तो जिन तत्वों की विद्दुत ऋणात्मक ऑक्सीकरण संख्या रखती है तथा जिस तत्व की विद्दुत ऋणात्मकता कम होती है। वह धनात्मक ऑक्सीकरण संख्या रखता है।

F>Cl>Br>I

विद्दुत ऋणात्मकता का क्रम I+1 -Cl-1

Rule 3 – किसी भी यौगिक में किसी तत्व की ऑक्सीकरण संख्या यौगिक में उपस्थित सभी तत्वों के ऑक्सीकरण संख्या के योग का उस पर उपस्थित आवेश के बराबर होता है।

SO4-2 = सल्फेट

माना की सल्फर (S) की ऑक्सीकरण संख्या x है तथा ऑक्सीकरण संख्या Y है तो –

x + 4*y = -2

Rule 4 – I-A वर्ग के सभी तत्वों की ऑक्सीकरण संख्या +1 होती है।

I-A Group या वर्ग = Li, Na, K, Rb, Cs, Fr

II-A वर्ग के सभी तत्वों की ऑक्सीकरण संख्या +2 होती है।

II-A Group या वर्ग = Be, Mg, Ca, Sr, Ba, Ra

III-A वर्ग के सभी तत्वों की ऑक्सीकरण संख्या +3 होती है।

III-A Group = B, Al, Ga, In, Tl = = +3

F फ्लोरीन तत्व की विद्दुत ऋणात्मकता सबसे अधिकतम होती है तथा इसकी ऑक्सीकरण संख्या सदैव -L होती है।

Rule 5 – सामान्य अवस्था में हाइड्रोजन की ऑक्सीकरण संख्या +1 होती है।

हाइड्राइडो में हाइड्रोजन की ऑक्सीकरण संख्या -1 होती है। जैसे –

I-A Hydride, II-A Hydride, III-A Hydride लैन्थेनाइड तथा एक्टिनाइड में हाइड्रोजन की ऑक्सीकरण संख्या -1 होती है।

अणुक हाइड्रोजन नवजात हाइड्रोजन की ऑक्सीकरण संख्या शून्य होती है।

H2 [H] = 0

Rule 6 –

ऑक्सीजन – (i) सामान्य अवस्था में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या -2 होती है। यह ऑक्सीकरण संख्या ऑक्साइडो तथा ऑक्सी अम्लो में होती है।

पराक्साइडो में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या -1 होती है। जैसे – H2O2, Na2O2 में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या -1 होती है।

Peroxide = O2-2

सुपर ऑक्साइडो में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या -1/2 होती है।

Superoxide = O2-1

उदाहरण – KO2 पोटैशियम सुपर ऑक्साइड

ओजोनाइडो में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या -1/3 होती है।

Ozonide = O3-1

जैसे – KO3 पोटैशियम ओजोनाइड

OF2 में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या +2 होती है।

OF2 = ऑक्सीजनडाईफ्लोराइड

O2F2 में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या +1 होती है।

O2F2 = डाईऑक्सीजन डाईफ्लोराइड

अणुक ऑक्सीजन तथा नवजात ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या शून्य होती है।

O2, O3 [O] = O

Rule 7 – किसी तत्व की अधिकतम ऑक्सीकरण संख्या वर्ग संख्या के बराबर होती है जबकि न्यूनतम ऑक्सीकरण संख्या वर्ग संख्या (-8) के बराबर होती है।

Rule 8 – किसी तत्व की औसत ऑक्सीकरण संख्या भिन्नात्मक हो सकती है परन्तु किसी तत्व की ऑक्सीकरण संख्या भिन्नात्मक नही हो सकती है।

N3H = Hydrozoic Acid

3N = 0 + 0 – 1

N = -1/3

N3H

3NH = 0

3N = – 1

N = -1/3

Rule 9 – मुक्त अवस्था में प्रत्येक तत्व की ऑक्सीकरण संख्या शून्य होती है। जैसे – सोडियम व कार्बन की ऑक्सीकरण संख्या शून्य है।

Rule 10 – किसी ऐसे यौगिक में जिसमे समान परमाणु उपस्थित हो तो समस्त परमाणुओं की ऑक्सीकरण संख्या शून्य होती है। जैसे – S8 में S की ऑक्सीकरण संख्या, P4 में P की ऑक्सीकरण संख्या, H2 में H की ऑक्सीकरण संख्या, O3 में O की ऑक्सीकरण संख्या शून्य होती है।

Rule 11 – प्रत्येक उदासीन यौगिक में उपस्थित तत्वों की ऑक्सीकरण संख्या का योग शून्य होता है।

यौगिक की ऑक्सीकरण संख्या = यौगिक में सभी तत्वों के परमाणुओं की ऑक्सीकरण संख्या का योग = 0

Rule 12 – यौगिको में सभी धातुओ की ऑक्सीकरण संख्या सदैव धनात्मक होती है।

Rule 13 – किसी संकर यौगिक में उदासीन लिगेण्ड की ऑक्सीकरण संख्या शून्य होती है। जैसे – [Cu(NH3)4]SO4 में NH3 की ऑक्सीकरण संख्या जीरो होती है।

ऑक्सीकरण तथा अपचयन में अंतर

ऑक्सीकरण (Oxidation)अपचयन (Reduction)
इसमें हाइड्रोजन निकलता है। इसमें हाइड्रोजन जुड़ता है।
इसमें ऑक्सीजन जुड़ता है। इसमें ऑक्सीजन पृथक होती है।
इसमें विद्दुत ऋणात्मक अवयव का अनुपात बढ़ता है।  इसमें विद्दुत ऋणात्मक अवयव का अनुपात घटता है।  
इसमें विद्दुत धनात्मक अवयव का अनुपात घटता है। इसमें विद्दुत धनात्मक अवयव का अनुपात बढ़ता है।
इसमें विद्दुत धनात्मक अवयव की संयोजकता बढ़ती है। इसमें विद्दुत धनात्मक अवयव की संयोजकता घटती है।
इसमें ऑक्सीकरण संख्या बढ़ती है। इसमें ऑक्सीकरण संख्या घटती है।
इसमें इलेक्ट्रान अलग या पृथक होते है। इसमें इलेक्ट्रान ग्रहण होते है।
ऑक्सीकारक किसे कहते है?

ऑक्सीकारक (Oxidising Agent) –

ऐसे पदार्थ जो अभिक्रिया में इलेक्ट्रान ग्रहण करते है या दूसरे पदार्थो को ऑक्सीकृत करके खुद अपचयित होते है ऑक्सीकारक कहलाते है। ऑक्सीकरण क्रिया में ऑक्सीकारक पदार्थ अपचयित हो जाता है।

अपचायक किसे कहते है?

अपचायक (Reducing Agent) –

ऐसे पदार्थ जो अभिक्रिया में इलेक्ट्रान का त्याग करते है या दूसरे पदार्थो को अपचयित करके खुद ऑक्सीकृत होते है या जो इलेक्ट्रान पृथक करते है या जिनकी ऑक्सीकरण संख्या में वृद्धि होती है। अपचायक कहलाते है। अपचयन की क्रिया में अपचायक पदार्थ ही ऑक्सीकृत हो जाते है।

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