What is the cell in Hindi|कोशिका|Type, Easy भाषा में

हेलो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में कोशिका के बारे में जानेगे कि कोशिका क्या है? (What is cell in Hindi) और इसके बारे में स्टेप बाई स्टेप अच्छी तरह से जानेंगे तो चलिए शुरू करते है।

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कोशिका किसे कहते है?(What is cell in Hindi)

सर्वप्रथम पौधों के लिए जर्मन वनस्पति बैज्ञानिक M.J. Schleiden ने 1838 में कोशिका के सिधांत को तैयार किया था। इसे 1839 में जर्मन शरीर-विज्ञानी थियोडोर श्वान द्वारा जन्तुओ तक विस्तारित किया गया था।

What is meaning of cell in Hindi?

Cell को हिन्दी में कोशिका कहते है।  

कोशिका सिधांत के अनुसार – सभी जीवित जीव (पौधे, जंतु और सूक्ष्म जीव) अपनी कोशिकाओं की गतिविधियों और अंतःक्रियाओं का कुल योग हैं।

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कोशिका (Cell in Hindi) –

कोशिकाएँ सभी जीवित जीवों में संरचना और कार्य की मूलभूत इकाइयाँ हैं। इसका मतलब सभी जीवित जीव एक कोशिका या बहुत से कोशिकाओ से मिलकर बने है।

History of cell Theory –

उन्नीसवीं शताब्दी की शुरुआत में पौधों और जानवरों के ऊतकों और कोशिकाओं की संरचना के बारे में कई जंतु बैज्ञानिको और वनस्पति बैज्ञानिको द्वारा की गई खोजों ने कोशिका सिद्धांत के निर्माण में योगदान दिया था।

बैज्ञानिक Robert Brown ने सन 1831 में केन्द्रक (nucleus) की खोज की किये थे।

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बैज्ञानिक Dumortier ने सन 1831 में शैवाल में कोशिका विभाजन का अध्ध्यन किये थे और बैज्ञानिक Von Mohl ने 1835 में जंतु कोशिको में कोशिका विभाजन का वर्णन किये थे।

बैज्ञानिक Purkinje और Von Mohl सन 1836-37 में कोशिका द्रव्य का वर्णन किये थे, और इन्होने कोशिका और कोशिकीय गतिविधियों के महत्व को स्थापित किया।

R. Virchow ने 1835 में अपने प्रसिद्ध अमोर्फिस्म ‘Omniscellulae a cellula’ को व्यक्त किया जिसका अर्थ है। कि सभी कोशिकाएं पहले से मौह्जूद कोशिकाओ से उत्पन्न होती है। इन्होने जीवों के प्रजनन में एक केन्द्रीय घटना के रूप में कोशिका विभाजन की स्थापना की।

बाद में, कोशिका सिद्धांत के विकास के बाद, फ्लेमिंग ने स्थापित किया कि कोशिकाएँ कोशिका विभाजन द्वारा मौजूदा पीढ़ी और अगली पीढ़ी के बीच निरंतरता सुनिश्चित करती हैं।

युग्मक निर्माण के समय न्यूनीकरण विभाजन की खोज और भ्रूण के विकास से पहले निषेचन ने कोशिका सिद्धांत में सुधार और समर्थन किया और कोशिका सिद्धांत के मोड संस्करण के निर्माण में मदद की।

कोशिका सिद्धांत की आवश्यक विशेषताएं –

(Essential Features of Cell Theory in Hindi)

  1. कोशिका जीवधारियों की क्रियात्मक एवं संरचनात्मक इकाई है जो चारो ओर से एक झिल्ली द्वारा घिरी होती है तथा प्रजनन द्वारा अपने जैसी संरचना बनने ने सक्षम होती है
  2. कोशिकाए वंशागति की इकाईया होती है।
  3. नये कोशिकाओं की उत्पत्ति केवल पहले से मौजूद कोशिकाओ से होती है।
  4. किसी जीव की गतिविधियाँ उसके घटक कोशिकाओं की गतिविधियों का परिणाम होती हैं।
  5. बहुकोशिकीय जीवों में अपनी एकीकृत भूमिका के अलावा प्रत्येक कोशिका का अपना जीवन होता है।
  6. अतः कोशिका जीवन की सबसे छोटी इकाई है। यह जीव द्रव्य का एक इकाई है जो प्लाज्मा मेम्ब्रेन द्वारा चारो ओर से घिरा होता है। यह एक केन्द्रक से मिलकर बना होता है जिसे नियंत्रण केंद्र भी कहते है, और कोशिकांगों के साथ कोशिका द्रव्य या साइटोसोल होता है इसे कोशिकीय गतिविधियों का केंद्र कहते है।
कोशिका सिद्धांत का महत्व (Significance of Cell Theory in Hindi)-

कोशिका सिद्धांत की आधुनिक अवधारणा विविध जीवित रूपों, जीवाणुओं  से मनुष्य के बीच संरचनात्मक और कार्यात्मक संबंधों पर जोर देती है।

सभी कोशिकाओं में उनके कार्य और स्थिति के बावजूद, साइटोप्लाज्म में एक नाभिक एम्बेडेड या अंतर्निहित होता है, और कोशिका झिल्ली (संरचनात्मक ढांचा में इकाई) से घिरा होता है, और सभी कोशिकाओं में समान उपापचयी प्रक्रियाएं होती हैं। मौलिक या विशिष्ट (कार्य की एकता) हो। इसका तात्पर्य यह है, कि सभी जीवित प्राणियों की उत्पत्ति उसी प्राचीन पैतृक या बपौती प्रकार से हुई है। जो लगभग दो या तीन अरब वर्ष पहले उत्पन्न हुई थी।

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PROKARYOTIC CELLS IN HINDI

कोशिका की परिभाषा (Definition of cell in Hindi) –

कोशिका सभी जीवित जीवों की मूलभूत संरचना और कार्यों की सबसे छोटी और पूर्ण अभिव्यक्ति या इकाई है। यह संरचना, कार्य और आनुवंशिकता की इकाई का प्रतिनिधित्व करता है। इसे एक पतली अर्धपारगम्य प्लाज्मा झिल्ली में संलग्न जीवद्रव्य (protoplasm) की इकाई के रूप में भी वर्णित किया गया है और इसके भीतर एक नाभिक है।

कोशिका के प्रकार (Type of Cells in Hindi) –

कोशिका दो प्रकार के होते है

प्रोकैर्योटिक कोशिका (Prokaryotic cells in Hindi) –

Prokaryotic ग्रीक भाषा के दो शब्दों से Pro+karyon से मिलकर बना है। जिसमे pro का अर्थ primitive या हिंदी में आदिम और karyon का अर्थ nucleus या हिंदी में केन्द्रक होता है। 

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ये अपेक्षाकृत साधारण कोशिकाएँ होती हैं। जिनमें केवल कोशिका झिल्ली (cell membrane) होती है। इन्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम, गोल्जी कॉम्प्लेक्स, माइटोकॉन्ड्रिया, क्लोरोप्लास्ट और लाइसोसोम जैसे झिल्ली से बंधे हुए अंग अनुपस्थित होते हैं। सुगठित केन्द्रक भी अनुपस्थित होता है।

गुणसूत्र एक वंशानुगत मटेरियल है जो बहुत ही अधिक कुंडलित और वृत्ताकार होता है। जो कोशिका द्रव्य में नग्न अवस्था में होता है। यह केवल डीऑक्सीराइबोन्युक्लिक एसिड या DNA का बना होता है, और इसे न्यूक्लियॉइड (Nucleoid) कहते है जीवाणु, नीलहरित शैवाल और pleuropneumococci प्रोकैरियोटिक कोशिकाए होती है।

यूकैरियोटिक कोशिकाएं (Eukaryotic Cells in Hindi) –

इनमें एक वास्तविक केंद्रक होता है, अर्थात वंशानुगत पदार्थ (DNA) मूल प्रोटीन और न्युक्लियो प्रोटीन से युक्त होता है, और केन्द्रकीय आवरण द्वारा कोशिका द्रव्य से अलग होता है। इनमे झिल्ली या मेम्ब्रेन से बंधे अंग उपस्थित होते हैं।

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विकासवादी दृष्टिकोण से प्रोकैरियोटिक कोशिकाए प्राचीन है, और यूकैरियोटिक कोशिकाएं इन्ही प्रोकैरियोटिक कोशिकाओ से विकसित हुए है।

प्रोकैरियोटिक कोशिका की विशेषताएं (Characteristics of a Prokaryotic cell in Hindi) –

  • प्रोकैरियोटिक कोशिका की मुख्य विशेषताएं निम्न है।
  • ये बहुत छोटे आकार के होते है। लगभग माइटोकांड्रिया के आकार के होते है।
  • ये एक विशिष्ट केन्द्रक के बिना होते है अर्थात न्युक्लिओलस और केन्द्रक आवरण अनुपस्थित होते है।
  • इनमे वंशानुगत पदार्थ एकल गुणसूत्र के रूप में होता है। प्रोकैरियोटिक गुणसूत्र एक एकल गोलाकार गुणसूत्र होता है DNA डबल stranded अणु का बना होता है।
  • इनमे मूल प्रोटीन हिस्टोनेस नही होता है।

कोशिका प्लाज्मा मेम्ब्रेन से घिरा होता है। यह यूकैरियोटिक प्लाज्मा मेम्ब्रेन से भिन्न होता है। इसके निम्नलिखित विशेषताएं है –

  • इसमें स्टेरोल्स नहीं होता है।
  • बैक्टीरिया में प्रोटीन से फॉस्फोलिपिड का अनुपात (2:1) उच्च होता है। जबकि यूकैरियोटिक में (1:1) कम होता है।
  • एक कोशिका भित्ति या एक कैप्सूल प्लाज्मा मेम्ब्रेन के बाहर की तरफ उपस्थित हो सकता है। लेकिन यह noncellulosic होता है यह कार्बोहाइड्रेट्स और अमीनो एसिड का बना होता है।
  • मेम्ब्रेन से बंधे हुए कोशिकांग जैसे कि इंडोप्लाज्मिक रेटीकुलम, गोल्जी काम्प्लेक्स, लाइसोसोम, माइटोकांड्रिया और क्लोरोप्लास्ट अनुपस्थित होते है।
  • कुछ मामलों में अन्दर का प्लाज्मा झिल्ली मुड़ा होता है। और यह मीसोसोम और chromatophores के रूप में होता है।
  • प्लाज्मा मेम्ब्रेन का आंतरिक सतह में श्वसन उपापचय, प्रकाशसंश्लेषी और लिपिड उपापचय का एंजाइम शामिल है। 
  • प्रोकैरियोटिक राइबोसोम 70S प्रकार का होता है।
  • उनका कोशिका द्रव्य लहराने वाला गति प्रदर्शित नहीं करता है।
  • प्रोकैरियोटिक कोशिकाओ में flagella और Pilli शामिल होता है।
  • ये बीटा-हाइड्रॉक्सी-ब्यूटाइरेट, ग्लाइकोजन और फॉस्फेट कणिकाए जैसे पॉलीमराइज़्ड फैटी एसिड को स्टोर करते हैं।

यूकैरियोटिक कोशिका (Eukaryotic Cell in Hindi)

कोशिका की संरचना (The cell Structure) –

एक प्ररूपी जंतु कोशिका तीन भागो से मिलकर बना होता है।

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  1. प्लाज्मा झिल्ली (Plasma Membrane or Cell Membrane)
  2. केन्द्रक (Nucleus)
  3. कोशिका द्रव्य (Cytosome or Cytoplasm)

सबसे पहले हम लोग प्लाज्मा मेम्ब्रेन के बारे में जान लेते है।

कोशिका झिल्ली (Plasma Membrane or Cell Membrane) –

संरचना (Structure) –

कोशिका का कोशिका द्रव्य खासकर एक न दिखाई देने वाले पतली लिपो-प्रोटीन के आवरण द्वारा घिरा होता है। जिसे प्लाज्मा मेम्ब्रेन कहते है। यह दो लेयर का बना होता है लिपिड अणुओ के बीच सैंडविच प्रोटीन के दो लेयर होते है। इसमें सूक्ष्म छिद्र होते है। जो कोशिका में जाने और आने वाली पदार्थो से सम्बंधित होती है। और ये विशेष आकार के अणुओ को आने-जाने की अनुमति देते है। मतलब किस प्रकार के अणुओ को कोशिका के अन्दर जाना है कि नही जाना है। यही फैसला करते है। प्लाज्मा झिल्ली अपने अधिनियमों के अनुसार चुनता है कि यह कोशिका के अन्दर जाने योग्य है की नहीं।

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कार्य (Function) –

  • प्लाज्मा झिल्ली कोशिका को यांत्रिक सपोर्ट और एक निश्चित बाह्य आकृति प्रदान करती है।
  • यह इसकी जीवित मशीनरी का एक हिस्सा बनाता है। क्योंकि कोशिका में प्रवेश करने या छोड़ने वाली हर चीज को इसमें से गुजरना होगा।
  • यह कोशिका में प्रवेश करने या छोड़ने वाले पदार्थों पर चयनात्मक प्रभाव डालता है। यानि की यह पहले सेलेक्ट करता है कि यह अन्दर जाने या निकलने लायक है कि नहीं तभी उसे जाने या निकलने देता है।

प्लाज्मा झिल्ली के चारो तरफ एक कठोर अजीवित और सहारा देने वाली हो सकती है। जिसे कोशिका भित्ति या cell wall कहते है। इसकी जंतु कोशिकाओं में कमी होती है लेकिन यह मोटा होता है और पौधों में cellulose का बना होता है।

केन्द्रक (Nucleus) –

संरचना (Struucture) –

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केन्द्रक यूकैरियोटिक कोशिका में शरीर के बीच में पाया जाता है। सामान्यतः यह अंडाकार, गोलाकार या मंडलाकार होता है। लेकिन खंडदार या लम्बा और फीते जैसा भी हो सकता है। यह कई अलग-अलग टुकड़ों से बना एक एकल शरीर हो सकता है या कोशिका पदार्थ में विसरित क्रोमैटिन कणिकाओं के रूप में हो सकता है।

वेसिकुलर न्यूक्लियस एक विशिष्ट केन्द्रिकीय आवरण जो न्यूक्लियोप्लाज्म या केन्द्रकीय रस से संलग्न होता है। इसके द्वारा चारो तरफ से घिरा होता है। प्रोकैरियोटिक कोशिकाओ में केन्द्रकीय डीओक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड (डीएनए) केन्द्रिकीय झिल्ली द्वारा कोशिका द्रव्य से अलग नहीं होता है।

  1. केन्द्रकीय आवरण संरचना और कार्य को छोड़कर प्लाज्मा मेम्ब्रेन के समान होता है। यह दो झिल्लियो का बना होता है और यह Perinuclear space के द्वारा अलग होता है। न्युक्लियोप्लाज्म परिवर्तनशील स्थिरता का एक स्पष्ट और पारदर्शी सजातीय तरल है। इसमें केन्द्रकीय रेटीकुलम और न्युक्लियोलस शामिल है।
  2. केन्द्रकीय रेटीकुलम – न्यूक्लियर रेटीकुलम क्रोमेटिन सूत्रों, मनके के साथ मोटे क्रोमेटिन दाने का एक अच्छा जाल होता है। कोशिका विभाजन के दौरान क्रोमेटिन सूत्रों या छड़ो में संघनित हो जाते है जिसे गुणसूत्र (Chromosome) कहते है। ये महत्वपुर्ण अनुवांशिक वाहक होते है। मतलब की माता-पिता के गुणों को संतानों में पहुचाने का काम करते है। इसमें क्रोमेटिन और न्युक्लियो प्रोटीन रासायनिक घटक होते है। इसमें चार मुख्य अणु होते है। एक कम अणुभार वाला प्रोटीन हिस्टोन होता है और एक जटिल DNA और RNA होता है।  

कार्य (Function) –

  • केन्द्रक सेल या कोशिका के उपापचय गतिविधियों को कंट्रोल करता है।
  • यह कोशिका विभाजन के दौरान एक सक्रिय भाग लेता है।
  • यह अनुवांशिक सूचनाओ को पीढ़ी दर पीढ़ी तक पहुचाता है।
कोशिका द्रव्य किसे कहते है? (What is Cytoplasm in hindi)

कोशिका द्रव्य (Cytosol or Cytoplasm) –

कोशिका के अंदर का भाग या आंतरिक भाग परिवर्तनशील स्थिरता के साथ एक रंगहीन, पारदर्शी द्रव से भरा होता है। इसे कोशिका द्रव्य कहते है। इसमें उपसूक्ष्म तंतु, अन्तः झिल्ली तंत्र, मेम्ब्रेन-बाउंड ऑर्गेनेल और नॉनमेम्ब्रेनस ऑर्गेनेल, संरचना रहित पदार्थ या कोशिका द्रव्य मैट्रिक्स होते है। कोशिका द्रव्य के विभिन्न घटक होते है।

  1. Cytoplasmic Fibrils and Cytoskeleton
  2. Endomembrane System
  3. Membrane-bound Organelles
  4. Nonmembranous Organelles

कोशिका द्रव्य तंतु और कोशिका कंकाल (Cytoplasmic Fibrils and Cytoskeleton) –

 कोशिका का कोशिका कंकाल पतली, मोटी और मध्यम तंतु और सूक्ष्म नालिकाओ से बना होता है। ये एक जाल के रूप में होती है। कोशिका कंकाल तंतु महीन धागे जैसे सुक्ष ट्रैब्युलर जाल के एक जाल तंत्र द्वारा परस्पर जुड़ा रहता है। यह जाल भी बहुत से झिल्लीदार अंग से परस्पर जुड़ा रहता है।

अन्तः झिल्ली तंत्र (Endomembrane System) –

कोशिका द्रव्य के इन्डोमेम्ब्रेन सिस्टम में अन्तः प्रदव्ययी जलिका (Endoplasmic reticulum), गोल्जी काम्प्लेक्स (Golgi comlex), और केन्द्रिकीय आवरण (Nuclear envelope) शामिल है माइटोकांड्रिया, क्लोरोप्लास्ट, लाइसोसोम और पेरोक्सीसोम्स ये झिल्लीदार अंग होते है।

अन्तः प्रदव्ययी जलिका (Endoplasmic reticulum) –

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यह कोशिका द्रव्य मैट्रिक्स में पुटिकाओं और नलिकाओं के चैनलों से परस्पर जुड़ा होता है। यह स्तनधारी एरिथ्रोसाइट्स और प्रोकैरियोटिक कोशिकाओ को छोड़कर लगभग सभी कोशिकाओ में उपस्थित होता है। ये नलिकाएं इकाई झिल्लियों से घिरी होती हैं और यहां तक कि ये आपस में जुड़े हुए चैनल भी बना सकती हैं।

उनमे से कुछ न्यूक्लियर मेम्ब्रेन के साथ जुड़ा होता है, कुछ प्लाज्मा झिल्ली के साथ जुड़ा होता है। जबकि कुछ दोनों के साथ जुड़ा हो सकता है। यह केन्द्रकीय पदार्थ के लिए बाहर की तरफ से एक सीधा रास्ता बनाता है। इनमे चैनल शाखाओ और बिना शाखाओ के हो सकते है। इसमें इन्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम के कुछ झिल्लियाँ राइबोसोम से जुड़े होते है।

राइबोसोम की उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम को खुरदुरे एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (RER) और चिकने एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (SER) में विभाजित किया गया है।

कार्य (Functions) –

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  • यह यांत्रिक सहारा प्रदान करता है।
  • यह कोशिकाओ और उनके अगल-बगल के पदार्थो के बीच आवागमन की सुबिधा प्रदान करता है।  
  • यह कोशिका (cell) के अन्दर आने जाने में मदद करता है।
  • अन्तः प्रदव्ययी जलिका (Endoplasmic reticulum) से जुड़े राइबोसोम प्रोटीन निर्माण में भाग लेते है।
  • स्मूथ इन्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम (SER) संश्लेषण के साथ में शामिल होते है और कोलेस्ट्राल और स्टेरॉयड हार्मोन का भण्डारण करते है।

Golgi Complex –

गोल्जी बॉडी मोटा, परतदार प्लेट की तरह संरचना होती है। प्रत्येक बॉडी में एक दूसरे के समानांतर व्यवस्थित चपटी थैलियाँ या सिस्टर्नी होते है। इनमे वसीय सामग्री प्रचुर मात्रा में होती है।

कार्य (Functions) –

  • गोल्जी काम्प्लेक्स कोशिका स्राव के साथ में शामिल होता है।
  • ये लाइसोसोम और पेरोक्सिसोम बनाते हैं।
  • ये उन उत्पादों के प्रोसेसिंग और पैकेजिंग में मदद करते है जो इन्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम से गुजरते है।

Membrane-bound Organelles –

लाइसोसोम (Lysosome in Hindi) –

ये गोलाकार पुतिकाओं और जलविद्युत उर्ज़ा (Hydrolytic enzymes) से भरे होते है। ये एक अकेले मेम्ब्रेन से बंधे होते है।

कार्य (Functions) –

  • हाइड्रोलाइटिक एंजाइम की उपस्थिति के कारण, लाइसोसोम निगले गए बैक्टीरिया और कोशकीय मलबे के पाचन में सहायता करते हैं।
  • इन्हें आत्मघाती थैलियाँ भी कहा जाता है क्योंकि जरूरत पड़ने पर लाइसोसोम फटकर एंजाइम छोड़ते हैं। जो कोशिकाओं के खुद के विनाश का कारण बनते हैं। ये मरे हुए और कमजोर कोशिकाओं को नष्ट करने में मदद करते है।
  • ये निगले गए कणों के अन्तःकोशिकीय पाचन में सहायता करते है।

पेरोक्सिसोम (Peroxisomes) –

ये लाइसोसोम के अपेक्षा छोटे होते है, और यह एक झिल्ली से घिरा होता है और इसमें पेरोक्सीडेस एंजाइम होते हैं जो पेरोक्साइड को तोड़ते हैं।

माइटोकांड्रिया (Mitochondria in Hindi) –

माइटोकॉन्ड्रिया वास्तव में या तो बिखरे हुए एक या ढेरो में हर प्रकार की जीवित कोशिका में पाए जाते हैं। जहाँ वे निरंतर गति में होते हैं। इनका आकार 2µ से 5µ तक होता है, और गोलाकार से लेकर छड़ या कणों तक के आकार का होता है। ये एक डबल लिपोप्रोटीन झिल्ली से घिरे होते हैं। इनका आंतरिक झिल्ली को कई कुंडलित परतों में डाल दिया जाता है। इन्हें क्रिस्टी कहा जाता है। इनके केन्द्रीय स्थान एक मैट्रिक्स से भरा होता है। इसमें ऑक्सीडेटिव एंजाइम होते हैं।

माइटोकांड्रिया के कार्य (Function of mitochodria in hindi) –

माइटोकांड्रिया के अन्दर श्वसन के ट्राइकारबॉक्सिलिक चक्र या क्रेब चक्र पूरा हो जाता है और कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के ऑक्सीकरण द्वारा एडीनोसिन ट्राईफॉस्फेट (ATP) के रूप में ऊर्जा निकलती है इसलिए माइटोकांड्रिया को कोशिका का पॉवर हाउस कहा जाता है।

प्लाज्मिड (Plasmids) –

प्लाज्मिड सामान्य रूप से पौधों के कोशिकाओ में पाया जाता है। लेकिन जंतु कोशिकाओ में सीमित होता है। इनके विभिन्न रूप और रंग होते है उनमे हरे रंग को क्लोरोप्लास्ट के रूप में जानते है। मतलब इनमे हरा रंग क्लोरोप्लास्ट में उपस्थित क्लोरोफिल के कारण होता है।

प्लाज्मिड के कार्य (Function of Plasmids in hindi) –

  1. ये रासायनिक सक्रियता के केंद्र होते है प्रकाश संश्लेषण के दौरान क्लोरोप्लास्ट कार्बोहाइड्रेट का संश्लेषण करता है।
  2. यह संश्लेषित भोजन को स्टोर करता है।
  3. इनमे वर्णक होते है (क्लोरोप्लास्ट)।

रिक्तिकाए (Vacuoles) –

ये कोशिका द्रव्य में खोखले स्थान होते है। ये एक निश्चित मेम्ब्रेन से पंक्तिबद्ध होते है और पानी और दूसरे घुलनशील पदार्थों से भरे होते है। ये पादप कोशिकाओं में अधिक बार होते हैं इनका मुख्य कार्य कोशिका में उचित आन्तरिक दबाव को बनाये रखना होता है। हालांकि प्रोटोजोआ के भोजन रिक्तिकाएं और सकुचनशील रिक्तिकाएं क्रमशः पाचन और उत्सर्जन में सहायता करती हैं।

Nonmembranous Organelles –

  1. राइबोसोम (Ribosomes) – ये छोटे दाने के रूप में होते है ये कोशिका द्रव्य में स्वतंत्र रूप में उपस्थित होते है। या इन्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम के झिल्ली से जुड़े होते है। ये राइबोन्यूक्लिक एसिड (RNA) और प्रोटीन के बने होते है। ये अमीनो एसिड से प्रोटीन के संश्लेषण में मदद करते हैं।
  2. स्रावी कणिकाएँ या ज़ाइमोजेन कणिकाएँ (Secretory granules or zymogen granules) – ये एंजाइम और स्राव के उत्पादन में प्रारंभिक चरणों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  3. कामोत्तेजक पदार्थ (Ergastic substance) – विभिन्न निर्जीव पदार्थ साइटोप्लाज्म के अंदर कणिकाओं, गोले या बूंदों के रूप में पाए जाते हैं। ये आमतौर पर आरक्षित खाद्य पदार्थ होते हैं।

दोस्तों आशा करता हूँ कि आपको कोशिका क्या है? (What is cell in Hindi) के बारे में दी गई जानकारी पसंद आई होगी अगर पसंद आयी है तो प्लीज इसे अधिक से अधिक शेयर करे दोस्त एक आर्टिकल लिखने में काफी मेहनत लगती है तो प्लीज इसे जरूर शेयर करें

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