प्लाज्मा झिल्ली Plasma Membrane in Hindi Very Easy 2022

हेलो दोस्तों स्वागत है आपका इस आर्टिकल में दोस्तों आज हम इस पोस्ट में जानेंगे की प्लाज्मा झिल्ली क्या है? (What is Plasma Membrane in Hindi?) तो चलिए बिना समय बर्बाद किये शुरू करते है।

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दोस्तों सबसे पहले हम बात कर लेते है कि प्लाज्मा झिल्ली को Hindi में क्या कहते है।

What is Plasma membrane in Hindi meaning?

प्लाज्मा मेम्ब्रेन को हिंदी में प्लाज्मा झिल्ली कहते है।

अब हम बात करेंगे प्लाज्मा झिल्ली के परिभाषा के बारे में तो चलिए इसके परिभाषा के बारे में भी जान लेते है।

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प्लाज्मा झिल्ली क्या है? (What is Plasma Membrane in Hindi?)

प्लाज्मा झिल्ली की परिभाषा (Definition of Plasma Membrane in Hindi) –

कोशिका के अन्दर कोशिका द्रव्य पाया जाता है और यह कोशिका द्रव्य बाहर से एक झिल्ली द्वारा घिरा होता है। इसी झिल्ली को प्लाज्मा मेम्ब्रेन कहा जाता है, और यह प्लाज्मा मेम्ब्रेन कोशिकीय पदार्थो को बह जाने से रोकती है। इसके कार्य को और अच्छे से समझाने के लिए हमें विषरण क्या होता है। इसके बारे में जानना होगा।

विसरण क्या होता है?  (What is Diffusion in Hindi?)

विसरण (Diffusion) –

इस प्रक्रिया में अणुओ का जो प्रवाह होता है, वह उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता की ओर होता है। अतः विसरण द्वारा प्लाज्मा मेम्ब्रेन से हो करके कोशिका के लिए आवश्यक गैसे कोशिका में जा सकती है, और कोशिका के लिए हानिकारक गैसे या गैसीय पदार्थ अपनी उच्च सांद्रता के कारण कोशिका के बाहर निकाल दिए जाते है। इस तरह से प्लाज्मा मेम्ब्रेन कोशिका द्रव्य के आयनिक सांद्रता को मेनटेन बनाये रखने में सहायता करता है। ।

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ये तो हो गया प्लाज्मा मेम्ब्रेन की परिभाषा और उसके थोड़े बहुत कार्य के बारे में जानकारी अब हम बात करेंगे। इसके Ultrastructure के बारे में तो चलिए शुरू करते है।

प्लाज्मा झिल्ली का बाह्य संरचना कैसी है? (Ultra structure of Plasma Membrane in Hindi?)

बाह्य संरचना (Ultrastructure) –

             दोस्तों अगर प्लाज्मा मेम्ब्रेन के बारे में बात करें तो इसकी जो मोटाई होती है। वह 75 एंगस्ट्राम होती है, लेकिन यह मोटाई (Thickness) भिन्न – भिन्न प्रकार के कोशिकाओ (Cells) में भिन्न – भिन्न होती है, और इसकी मोटाई (thickness) की रेंज 75-105 एंगस्ट्राम या अधिकतम 215 एंगस्ट्राम होता है, और जब इस प्लाज्मा मेम्ब्रेन को इलेक्ट्रान सूक्ष्मदर्शी के अन्दर रखकर देखा गया। तो इसमें तीन विशिष्ट लेयर्स पाये गये।

  1. प्रोटीन की एक बाहरी घनी परत (Outer dense layer of Protein) – इसकी मोटाई 20 – 25 एंगस्ट्राम होती है।
  2. लिपिड्स की एक मध्य जैव-आणविक परत (Middle bimolecular layer of Lipids) – इस परत की मोटाई 30 – 35 एंगस्ट्राम होती है।
  3. प्रोटीन की आंतरिक घनी परत (Inner dense layer of protein) – इस परत की मोटाई 20 – 25 एंगस्ट्राम होती है।

प्लाज्मा झिल्ली में दो Monomolecular प्रोटीन परतों के बीच एक द्वि-आणविक लिपिड्स होता है। इस तरह इन मेम्ब्रेन को बैज्ञानिक Robertson  ने इकाई मेम्ब्रेन (Unit Membrane) के रूप में व्याखित किया गया। उन्होंने पाया कि एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम, गॉल्गी कॉम्प्लेक्स, न्यूक्लियर मेम्ब्रेन, माइटोकॉन्ड्रिया, प्लास्टिड्स और लाइसोसोम जैसी कई तरह की सेल संरचनाएं एक यूनिट मेम्ब्रेन से घिरी होती हैं।

यह तो हो गया प्लाज्मा मेम्ब्रेन की बाह्य संरचना के बारे में, अब हम बात करेंगे प्लाज्मा झिल्ली (Plasma Membrane in Hindi) की रासायनिक संघटन (Chemical composition) के बारे में।

Plasma Membrane in Hindi
Plasma Membrane in Hindi
प्लाज्मा मेम्ब्रेन की रासायनिक संघटन (Chemical Composition of Plasma Membrane in Hindi)

जंतु कोशिकाओ का प्लाज्मा मेम्ब्रेन प्रोटीन, लिपिड्स और थोड़ी मात्रा में कार्बोहाइड्रेट से मिलकर बना होता है।  

सबसे पहले हम बात करेंगे प्रोटीन के बारे में तो चलो जान लेते है।

प्रोटीन (Protein) –

प्रोटीन प्लाज्मा मेम्ब्रेन का मुख्य और बड़ा हिस्सा होता है, और यह प्रोटीन प्लाज्मा मेम्ब्रेन से R. B. C. अलग करके एकत्रित करने का काम करता है, और इस काम को tektins के रूप में जाना जाता है। यह 2 टाइप के होते है।

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  1. Peripheral or extrinsic proteins
  2. Integral or intrinsic proteins

सबसे पहले हम Peripheral proteins के बारे में जानेंगे।

Peripheral Protein kya hota hai? (What is Peripheral protein in hindi?)

Peripheral proteins –

दोस्तों यह प्रोटीन प्लाज्मा झिल्ली के मिडिल लिपिड लेयर के बाहरी (Outer) और आंतरिक लेयर्स के रूप में होता है। यह प्लाज्मा मेम्ब्रेन से बढ़िया से जुड़ा नही होता है। इसलिए इसे हल्के से ट्रीटमेंट के द्वारा अलग किया जा सकता है। ये घुलनशील और जलीय घोल है। एरिथ्रोसाइट्स में पाए जाने वाले स्पेक्ट्रिन, माइटोकॉन्ड्रिया में पाए जाने वाले साइटोक्रोम C और इलेक्ट्रोप्लेक्स झिल्ली में एसिटाइलकोलिनेस्टरेज़ पेरिफेरल प्रोटीन होते हैं।

Integal Protein kya hota hai? (What is Integal protein in hindi?)

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Integal proteins –

ये प्रोटीन आंशिक या पूर्ण रूप से लिपिड लेयर में प्रवेश करते हैं, और उनके पोलर हेड झिल्ली की सतह से बाहर निकलते हैं, जबकि नॉन पोलर क्षेत्र झिल्ली के आंतरिक भाग में अंतर्निहित होते हैं। ये जल में अघुलनशील होते है उन्हें झिल्ली से अलग करने के लिए कुछ डिटर्जेंट या कार्बनिक विलायक की जरूरत पड़ती है। ये या तो ऑलिगोसैकराइड्स (ग्लाइकोप्रोटीन) या फॉस्फोलिपिड्स (प्रोटियोलिपिड्स या लिपोप्रोटीन) से जुड़े होते हैं।

अब हम बात करेंगे लिपिड्स के बारे में।

लिपिड्स क्या होते है? (What is Lipis in hindi?)

Lipids –

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       प्लाज्मा मेम्ब्रेन में 20% – 40% लिपिड्स होते है लिपिड के घटक तीन प्रकार के होते है।

  1. Phospholipids – जैसे – lecithin, serine, cephalin and sphingomyelin.
  2. Cholestrol
  3. Glycolipids
  4. Phospholipid are amphipathic

इनके पास हाइड्रोफिलिक सिर और हाइड्रोफोबिक पूँछ होता है।

Hydrophilic head end –

यह फॉस्फोलिपिड अणुओं का एक जल-प्रेमी (Water-loving) हिस्सा है, और इसे ध्रुवीय छोर (polar end) कहा जाता है। यह कॉलिन फॉस्फेट (Cholin phosphate) का बना होता है।

Hydrophobic tail end –

यह पानी से नफरत करने वाला भाग है जो पानी से दूर जाता है और इसे गैर-ध्रुवीय छोर (nonpolar end) के रूप में जाना जाता है। यह वसा अम्लो के दो अणुओ से मिलकर बनता है। ये दोनों अणु ग्लिसरॉल के माध्यम से उनके कार्बाक्सिल समूह (-COOH) के आधार से जुड़े होते है। ग्लिसरॉल मुड़कर के हाइड्रोफिलिक हेड से जुदा होता है।

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ये फॉस्फोलिपिड अणुये प्लाज्मा झिल्ली में दो समान्तर लेयर्स में त्रिज्यात: से व्यवस्थित होती है। अध्रुवीय हाइड्रोफोबिक सिरे एक-दूसरे का सामना करते हैं, जबकि, उनके ध्रुवीय हाइड्रोफिलिक सिरे प्रोटीन अणुओं या कार्बोहाइड्रेट के साथ जुड़े होते हैं।

कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) –

यूकेरियोटिक कोशिकाओं में प्लाज्मा झिल्ली और दूसरे अन्तः कोशिकीय झिल्लियो में कोलेस्ट्रॉल पाया जाता है। यह मुख्यरूप फॉस्फोलिपिड अणुओ के Tails में उपस्थित होते है। यह tails को कठोरता प्रदान करता है, और लिपिड बाईलेयर को यांत्रिक मजबूती प्रदान करता है।

ग्लाइकोलिपिड्स (Glycolipids) –

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ग्लाइकोलिपिड्स केवल बाहरी लिपिड लेयर में पाया जाता है। ये कार्बोहाइड्रेट श्रृंखला ले जाते हैं।

दोस्तों अब हम लिपिड्स के कार्य के बारे में अध्ययन करेंगे तो देर किस बात की चलिए शुरू करते है।

लिपिड्स के कौन – कौन से कार्य है?

लिपिड्स के कार्य (Functions of  Lipids in Hindi) –

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  1. लिपिड लेयर प्लाज्मा झिल्ली का संरचनात्मक ढांचा बनाती है।
  2. यह कोशिका में प्रवेश करने वाले आयनों और ध्रुवीय अणुओं के लिए एक पारगम्यता अवरोध बनाता है।    

कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates) –

                           प्लाज्मा झिल्ली में 2 से 10 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट होते हैं। ये हेक्सोज, हेक्सोसामाइन, फ्यूकोज और सियालिक एसिड हैं। ये दो अलग-अलग संयोजनों में होते हैं।

  • लिपिड से जुड़ा – ग्लाइकोलिपिड्स
  • प्रोटीन से जुड़ा – ग्लाइकोप्रोटीनस

दोस्तों आशा करता हूँ कि आपको, प्लाज्मा झिल्ली क्या है? (What is Plasma Membrane in Hindi?) इसके बारे में दी गई जानकारी पसंद आयी होगी अगर पसंद आयी है तो इसे अपने फेसबुक और अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये जिससे उन्हें भी इसका लाभ मिल सके।

धन्यवाद

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