Vishanu kya hai -विषाणु क्या है | Virus in Hindi very easy भाषा में 2022

नमस्कार दोस्तों, आज हम इस पोस्ट में जानने वाले है कि विषाणु क्या है? (What is virus in hindi?), विषाणु कितने प्रकार के होते है?, विषाणु की खोज किसने की थी? इससे सम्बंधित और भी जानकारिया दिया गया है तो चलिए शुरू करते है।

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विषाणु क्या है? (What is Virus in Hindi?)

विषाणु की परिभाषा (Diffinition of Virus) –

विषाणु एक अतिसूक्ष्मदर्शी सूक्ष्म जीव है जो रोगों को उत्पन्न करता है। ये न्यूक्लिक अम्ल और प्रोटीन से बने होते है। ये सजीव और निर्जीव के बीच के कड़ी होते है मतलब यह सजीव भी है और निर्जीव भी है इन्हें ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योकि ये जब किसी होस्ट के अन्दर होते है तो ये जैविक क्रिया करते है और जब यह किसी होस्ट में नही होते है तो यह निर्जीव की तरह होते है इसलिए इन्हें जीव और निर्जीव के बीच का कड़ी कहा जाता है।

सबसे पहले जान लेते है कि विषाणु की खोज किस बैज्ञानिक ने की थी।

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विषाणु की खोज किसने की थी? (Who was discovered of Virus in Hindi?)

विषाणु की खोज सबसे पहले बैज्ञानिक Iwanowski ने 1892 ई० में की थी। इन्होने tobacco-mosaic virus (TMV) की संरचना की व्याख्या एकदम डिटेल में दिए थे।

अभी तक तो हम लोगो ने विषाणु के कुछ बेसिक जानकारियां ले ली है तो चलिए हम लोग इनके लक्षणों के बारे में जान लेते है।

विषाणु के लक्षण (Characteristics of Virus in Hindi) –

जैसा कि मैंने आपको पहले ही बता दिया हूँ कि विषाणु अतिसूक्ष्मदर्शी सूक्ष्म जीव जो बीमारियों को उत्पन्न करती है।

ये Nucleic acid और प्रोटीन से बने होते है।

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इन्हें क्रिस्टललाइज्ड और क्रिस्टल के जैसे बोतलो में स्टोर भी किया जा सकता है।

अब हम लोग विषाणु के साइज़ के बारे में अध्ययन करेंगे।

विषाणु के आकार और आकृति (Size and Shape of Virus in Hindi) –

                                 वायरस का आकार 20 से 350 nm के बीच होता है या 0.1µ या व्यास में 300 mµ (मिली माइक्रोन) होता है। इनकी आकृति भिन्न – भिन्न होती है ये छड़ के जैसे हो सकते है और एक विद्दुत के तार (TMV) के जैसे हो सकते है और ये गोलाकार (mumps virus, herpes virus, influenza virus) या tadpole (T-even bacteriophase) के जैसे हो सकते है। विषाणुओं के कुछ रूप, विशेष रूप से बड़ी चेचक वाली विषाणुओं की तरह जटिल होती है रेबीज विषाणु का शेप बुलेट की तरह होता है।

विषाणु की साइज़ और शेप के बारे में तो लिया है चलो अब संरचना के बारे में भी जान लेते है।

विषाणु की संरचना (Structure of Virus in hindi) –

विषाणु की संरचना निम्नलिखित भागो से होती है।

Nucleic Acid – विषाणुओं और कोशिकीय जीवों में प्रमुख अंतर यह है कि विषाणुओं में केवल एक ही प्रकार का न्यूक्लिक अम्ल होता है अब वो चाहे DNA हो RNA कभी भी दोनों एक साथ नही होते है जबकि कोशकीय जीवों में दोनों प्रकार के न्यूक्लिक अम्ल होते है।

जिन विषाणुओं में न्यूक्लिक अम्ल DNA होता है उन्हें डीऑक्सीवायरस कहते है और जिनमे न्यूक्लिक अम्ल RNA होता है उन्हें राइबोवायरस कहते है। विभिन्न प्रकार के विषाणु न्यूक्लिक अम्ल संरचना में भिन्नता प्रदर्शित करते है जैसे – सामान्यतः

सभी प्लांट वायरस में Single stranded RNA होता है।

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जंतु विषाणुओं में Single stranded या कभी – कभी double stranded RNA या Double Stranded DNA पाया जाता है।

बैक्टीरियल विषाणुओं में सामान्यतः द्विरज्जुकी DNA होता है लेकिन कभी – कभी इसमें एक रज्जुकी RNA या DNA भी पाया जाता है।

अधिकांश कीट विषाणुओं में RNA होता है और केवल कुछ ही कीट विषाणु ऐसे होते है जिनके पास DNA होता है।

बहुत से जीवाणु और जंतु विषाणुओं का DNA सर्कुलर होता है जबकि अन्य में यह DNA के समान होता है। विषाणुओं से सावधानीपूर्वक न्यूक्लिक अम्ल प्राप्त करने से पता चलता है कि हर विषाणु में न्यूक्लिक अम्ल का सिर्फ एक अणु होता है, जिसमे न्यूक्लियोटाइडस पेयर्स की संख्या 1000 से लेकर 2,50,000 तक होती है। किन्तु किसी एक प्रकार विषाणु में इनकी संख्या निश्चित होती है। न्यूक्लिक अम्ल की मात्रा Viron के आकार पर निर्भर करती है। सामान्यतः बड़े आकार के Viron में न्यूक्लिक अम्ल की मात्रा ज्यादा होती है।

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अब आप के मान एक सवाल उठ रहा होगा कि ये Viron क्या होते है चलो इसके बारे में भी जान लेते है।

Viron कहते है? (What is Viron in Hindi?)

किसी विषाणु के पूरे एकल अणु (Complete single Particle) को Viron कहते है।

चलिए अब प्रोटीन कोट के बारे में भी जान लेते है।

  • Protein Coat – विषाणु के न्यूक्लिक अम्ल का कोर एक प्रोटीन आवरण से सेफ रहता है जिसे कैप्सिड कहते है। कैप्सिड बहुत से छोटी – छोटी समान उपइकाइयों से बनी होती है जो कैप्सोमेरेस (Capsomeres) कहलाते है। ये उपइकाईया एक हेलिकल या पालिहिड्रल ज्योमेट्रिक तरीके से व्यवस्थित रहती है जो एक विशिष्ट विषाणु के लिए विशेष होती है।
  • Helical viruses – ये विषाणु Cylindrical या छड़ के आकार के होते है और केन्द्रीय न्यूक्लिक अम्ल का स्ट्रैंड या रज्जु हेलिकल स्प्रिंग के समान कुंडलित होता है और जो प्रोटीन की उप इकाईया होती है। वे हेलिकल स्प्रिंग के चारो तरफ हेलिकल रूप में व्यवस्थित होती है।

उदाहरण – नए कान्स्टल विषाणु, मम्प्स विषाणु और TMV विषाणु है।

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पालिहिड्रल (बहुतलीय) विषाणु – इन विषाणुओं में, न्यूक्लिक अम्ल, बिना क्रम के खाली पालिहिड्रल हेड के अन्दर बंद रहता है। इन्हें फिर टेट्राहिड्रल, ऑक्टोहिड्रल और आइकोसाहिड्रल में वगीकृत किया गया है। यह इनके फेसेस या मुखों की संख्या पर निर्भर करता है। इन सभी में आइकोसाहिड्रल को सबसे कुशल आकार माना जाता है क्योकि कैप्सोमर की पैंकिंग और बेन्डिंग, लगभग गोल होती है। एक आइकोसाहिड्रल में 12 कोने, 20 तिकोने मुख और 30 धार होती है।

नाम पद्धति (Nomenclature) –

विषाणुओं के लिए द्विनाम पद्धति उपयुक्त न होने के कारण, विषाणुओं के नाम पद्धति की अंतर्राष्ट्रीय समिति ने 1968 ई० में एक नयी system प्रस्तुत की, इस सिस्टम के अनुसार प्रत्येक विषाणु के नाम के दो भाग है। जिसमे से पहला भाग विषाणु का प्रचलित नाम है और दूसरे भाग में विषाणु के बारे में सांकेतिक सूचना निहित होती है। दूसरे भाग को Cryptogram या बीजलेख कहते है। विषाणु का प्रचलित नाम कभी बदला नही जा सकता है। लेकिन बीजलेख विषाणु के सम्बन्ध में अनुसंधानों के फलस्वरूप प्राप्त हुई सूचना के आधार पर बदला जा सकता है।

एक बीजलेख में सांकेतिक सूचना के निम्नलिखित चार पेअर या युग्म होते है।

First pair – यह न्यूक्लिक अम्ल के प्रकार/न्यूक्लिक अम्ल में रज्जुको की संख्या को प्रदर्शित करता है।

Second pair – यह न्यूक्लिक अम्ल का आण्विक भार/विषाणु में न्यूक्लिक अम्ल की प्रतिशत मात्रा को प्रदर्शित करता है।

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Third pair – यह विषाणु का आकार/न्यूक्लियो प्रोटीन का आकार को प्रदर्शित करता है।  

Fourth pair – यह परपोषी की किस्म/संचरण में प्रयुक्त वाहक को प्रदर्शित करता है।

Example – टोबैको मोजैक वायरस (TMV) की बीजलेख = R/1 : 2/5 : E/E : S/A

जहाँ,

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First pair = Nucleic Acid RNA = R, एक रज्जुकी = 1

Second pair = न्यूक्लिक अम्ल का आण्विक भार = 2 (लाखों में)/न्यूक्लिक अम्ल की मात्रा = 5%

Third pair – विषाणु का दीर्घित आकार = E (elongated)/न्यूक्लियो प्रोटीन का आकार दीर्घित = E

Fourth pair – परपोषी बीजयुक्त पौधे = S (spematophytes)/विषाणु का संचरण संदूषित वायु = A (Air)

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विषाणुओं का वर्गीकरण (Classification of Viruses in Hindi) –

जैसा कि आपको पता है कि विषाणु बहुत ही छोटे आकार के होते है और इनमे जीव और निर्जीव दोनों के लक्षण पाए जाते है और इनका जीवाश्म भी नही मिलता है। इस वजह से इनका वर्गीकरण करना एक प्रॉब्लम है, अतः शुरू में विषाणुओं का वर्गीकरण परपोषी रेंज और क्लिनिकल महामारिक और वैकृत लक्षणों के आधार पर वर्गीकृत किया गया है।

विषाणु कितने प्रकार के होते हैं? (How many types of virus in hindi?)

पादप विषाणु (Plant viruse in Hindi) –

                    पादप विषाणु सिर्फ पौधों को संक्रमित करते है और परपोषियो के आधार पर इन्हें बैक्टीरियल वायरसेस, शैवाली वायरसेस, फंगल वायरसेस आदि अनेक उपवर्गों में विभाजित किया गया है।

अकशेरुकी विषाणु (Invertebrate viruse in Hindi) –

जैसा कि आपको नाम से पता चल जा रहा है। ये विषाणु किन जीवों को संक्रमित करंगे ये विषाणु अकशेरुकी जीवों को संक्रमित करते है।

कशेरुकी विषाणु (Vertebrate virus in Hindi) –

ये विषाणु कशेरुकी जन्तुओ को संक्रमित करते है।

द्वैत – परपोषी विषाणु (Dual host virus in hindi) –

इस वर्ग में रखे गये विषाणु दो अलग – अलग परपोषीयों को संक्रमित करते है।

बैज्ञानिक होम्स (Holms) ने 1948 में सभी विषाणुओं को एक Order – Virales में शामिल किया जिसे 3 उपवर्गों में बाट दिया गया।

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  1. Phagineae (फैजिनी)
  2. Phytophagineae (फाइटो फैजिनी)
  3. Zoophagineae (जूफैजिनी)

अब हम लोग एक – एक करके इन तीनो के बारे में जानेंगे।

Phagineae (फैजिनी) –

इस वर्ग में बैक्टीरिया को संक्रमित करने वाले विषाणुओं को रखा गया है यानि कि bacteriophages को रखा गया है।

Phytophagineae (फाइटो फैजिनी) –

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इस वर्ग में पौधों को संक्रमित करने वाले विषाणुओं को रखा गया है।

Zoophagineae (जूफैजिनी) –

इस वर्ग में जन्तुओ को संक्रमित करने वाले विषाणुओं को रखा गया है।

अल्ट्रासेंट्रीफ्यूज और इलेक्ट्रान सूक्ष्मदर्शी के द्वारा अध्ययन के आधार पर Lwoff, Horne और Tournier (1962) ने विषाणुओं को वर्गीकरण के LTH तंत्र को प्रस्तुत किया। जिसे विषाणुओं के नाम पद्धति की अंतर्राष्ट्रीय समिति ने 1966 में मान्यता दी।

यह निम्न लक्षणों पर आधारित है।

  1. Types of nucleic acids (न्यूक्लिक अम्ल के प्रकार)
  2. The molecular weight of the virus in Hindi (विषाणु का अणुभार)
  3. Shape and size of virus in Hindi (विषाणु का आकार और आमाप)
  4. Symmetry of virus in hindi (विषाणु की सममिति)
  5. Number of protein subunits in a capsid (कैप्सिड में प्रोटीन उपइकाइयों की संख्या)
  6. Diameter of nucleic acid coil (न्यूक्लिक अम्ल का कुंडलिनी का व्यास)
  7. Presence of outer envelope (बाह्य आवरण की उपस्थिति)
  8. Intercellualar multiplication (आंतरकोशिक प्रवर्धन की उपस्थिति)
  9. Temperature inactivation of virus in hindi (विषाणु की ताप निष्क्रियता)
  10. Method of viral transmission (विषाणु की संचरण विधि
  11. Symptoms of virus on host (विषाणु द्वारा परपोषी में उत्पन्न लक्षण)
मनुष्य में विषाणु जनित दो रोगों के नाम लिखिए।

Ans – पहला इन्फ्लुएंजा यह बीमारी Influenza virus से होता है और दूसरा रैबीज नामक बीमारी Rabies virus से होता है, जो कुत्ता या बन्दर के कटने से होता है।  

विषाणु से होने वाले रोग –

विषाणु से बहुत से रोग होते है जैसे – एड्स, चेचक, पोलियो, इंफ्लूएंजा, डेंगू बुखार, रेबीज, स्माल पॉक्स, measles, मम्प्स, ट्रेकोमा, हेपेटाइटिस इत्यादि।     

एड्स रोग किस विषाणु द्वारा होता है?

AIDS एक विषाणु से होने वाला रोग है AIDS का Full Form या पूरा नाम Acquire Immune Deficiency Syndrome होता है। यह बीमारी HIV (Human Immunodeficiency Virus) विषाणु से होता है।

दोस्तों आशा करता हूँ कि विषाणु क्या है? (What is Virus in Hindi?) के बारे में दी गयी जानकारी आपको पसंद आयी होगी। दोस्तों यदि आपकी इच्छा हो तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर कर सकते है जिससे उन्हें भी इस पोस्ट का लाभ मिल सके।

धन्यवाद

 

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