विषाणु क्या है? A to Z Information Simple भाषा में

नमस्कार दोस्तों, आज हम इस पोस्ट में जानने वाले है कि विषाणु क्या है? (What is virus in hindi?), विषाणु कितने प्रकार के होते है?, विषाणु की खोज किसने की थी? इससे सम्बंधित और भी जानकारिया दिया गया है तो चलिए शुरू करते है।

विषाणु क्या है? (What is Virus in Hindi?)

विषाणु दो चीजो से मिलकर बना होता है। न्यूक्लिक अम्ल (DNA/RNA) और प्रोटीन। किसी भी विषाणु में DNA और RNA दोनों एक साथ नही हो सकते है।

विषाणुओ की न्युक्लियोप्रोटीन संरचना होती है। न्युक्लियो का मतलब न्यूक्लिक अम्ल और यह दो प्रकार का होता है। डीएनए और आरएनए। और प्रोटीन का मतलब प्रोटीन।

Virus in Hindi, विषाणु क्या है
Virus in Hindi

विषाणु के लक्षण –

  1. ये पोषक यांत्रिकी का उपयोग करके अपनी संख्या को बढ़ाते है। मतलब ये किसी जीवित कोशिका के अन्दर जा करके उसके सभी कार्यो को अपने कण्ट्रोल में ले लेते है और उसमे गुणन करके अपनी संख्या को बढ़ाते है। जिसके अन्दर जाते है उसे इनका पोषक कहते है। क्योकि इसी से अपना पोषण प्राप्त कर रहे है।
  2. ये वृद्धि नही करते है। ये सिर्फ गुणन करते है।
  3. ये कोशिकारहित संवर्धन माध्यम में ये गुणन नही कर सकते है। संवर्धन माध्यम का मतलव पोषक पदार्थ हो लेकिन उसमे कोशिका न हो।
  4. ये परजीवी होते है क्योकि ये अपना पोषण, आवास और संख्या बढ़ाने के लिए पोषक पर निर्भर होते है।
  5. ये सजीव और निर्जीव के बीच की कड़ी है। क्यों है? क्योंकि ये शरीर के बाहर निष्क्रिय हो जाते है और शरीर के अन्दर सक्रिय हो जाते है।
  6. जब ये शरीर के बाहर होते है तो इन्हें Virion कहते है और जब शरीर के अन्दर होते है तो इन्हें Virus कहते है।
  7. जब विषाणु किसी के शरीर के अन्दर जाते है या संक्रमित करते है तो उसका शरीर इंटरफेरॉन नामक रसायन का निर्माण करता है। जो विषाणु को निष्क्रिय करने का कार्य करते है।

विषाणु से सम्बंधित खोजकर्ता या विषाणु की खोज किसने की थी? (Who was discovered of Virus in Hindi?)

सबसे पहले वैक्सीन को वैज्ञानिक Edward Jeener ने बनाया था जो चेचक (Small pox) रोग के लिए था। लेकिन विषाणु का खोज अभी नही हुआ था। इन्हें नही पता था कि यह विषाणु जनित रोग है।

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अब वैज्ञानिक लुइस पाश्चर ने भी रेबीज नामक रोग के लिए वैक्सीन बनाया लेकिन अभी भी विषाणु की खोज नही हुई थी लेकिन इन्होने ही Virus या विषाणु शब्द दिया था ये तो वही वाली बात हुई कि अभी बच्चा पैदा ही नहीं हुआ और उसका नाम रख दिया गया।

विषाणु की खोज सबसे पहले Iwanowski ने 1892 ई० में की थी। इन्होने तम्बाकू मोजेक विषाणु (Tobacco Mosaic Virus/TMV) की खोज की थी और इसके ऊपर अध्ययन करके सबको विषाणु के बारे में बताया था।

Beijernicks ने विषाणुओं के बारे में एक कथन दिया था “Contangium Vivum Fluidium” 

सबसे पहले वैज्ञानिक Stanley ने इलेक्ट्रान सूक्ष्मदर्शी में विषाणु को देखा था।

विषाणु की आकृति –

विषाणुओं की मुख्यरूप से तीन प्रकार की आकृति होती है।

  1. कुंडलित / Helical – इनका आकृति कुंडलित होता है। जैसे – TMV
  2. घनाकार / Cuboidal – इनका आकृति घनाकार होता है। जैसे – पोलियो 
  3. Binal – इनकी आकृति में कुंडलित और घनाकार दोनों पायी जाती है। जैसे – जीवाणुभोजी 

विषाणु के भाग या विषाणु की संरचना (Structure of Virus in hindi) –

विषाणु दो भागो से मिलकर बने है।

न्यूक्लिक अम्ल/Nucleoid – इसमें डीएनए या आरएनए होता है।

कैपसिड (Capsid) – प्रोटीन अणुओ के समूह को कैपसिड कहते है। प्रत्येक प्रोटीन इकाई या अणु को Capsomere कहते है। यह कैपसिड आवरण होता है जो न्यूक्लिक अम्ल की सुरक्षा करता है। 

TMV में Capsomere की संख्या 2130 होती है।

लेकिन कुछ विषाणुओं में एक और भाग मिलती है जिसे Envelop कहते है। यह विषाणुओं का बाहरी आवरण होता है जो प्रोटीन और लिपिड से बना होता है। प्रोटीन विषाणु की Capsid से ही मिला होता है लेकिन लिपिड को विषाणु अपने पोषक से प्रप्त कर लेता है। बाह्य आवरण की इकाई को Peplomere कहते है और यह Peplomere प्रोटीन और लिपिड से बना होता है। यह आवरण HIV विषाणु में देख सकते है।

न्यूक्लिक अम्ल –

न्यूक्लिक अम्ल दो प्रकार का होता है। डीएनए और आरएनए लेकिन विषाणुओं के अन्दर एक ही न्यूक्लिक अम्ल मिलता है अब वो चाहे डीएनए हो या आरएनए दोनों एक साथ नही हो सकते है।

DNA –

विषाणुओं में डीएनए दो प्रकार का मिलता है। एकल रज्जुकी और द्विरज्जुकी। लेकिन जीवाणु से लेकर बड़े जन्तुओ तक सभी में डीएनए द्विरज्जुकी होता है।

Example – T2, T4 जीवाणुभोजी, हेपेटाइटिस – B आदि विषाणु में द्विरज्जुकी DNA मिलता है। और Coliphaseϕ⨯174 और Coliphase MS–2 विषाणु में एकल रज्जुकी डीएनए मिलता है।

RNA –

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सभी जीवो के अन्दर RNA एकल रज्जुकी होता है। लेकिन विषाणुओं के अन्दर एकल रज्जुकी के साथ – साथ द्विरज्जुकी RNA भी मिलता है। एकल रज्जुकी RNA, DNA से ज्यादा क्रियाशील होता है और अस्थायी होता है मतलब जल्दी – जल्दी परिवर्तित होता है।

अब जल्दी – जल्दी परिवर्तन या Mutation होने से नये – नये विषाणु बनते है। और यही एकल रज्जुकी RNA वाले विषाणु सबसे ज्यादा रोग फैलाते है। जैसे – Polio, TMV, HIV, Influenza, HTLV आदि।

रीयोवायरस (Rhinovirus) इसमें द्विरज्जुकी RNA होता है। यह हमारे श्वसन मार्ग को संक्रमित करता है जिसे हम सर्दी – जुकाम बीमारी भी कहते है।

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विषाणु में गुणन (Multiplication in Virus) –

विषाणु में गुणन दो प्रकार का होता है।

  1. फेजिक 
  2. पीनोसाईटिक 

फेजिक – 

इसमें जब विषाणु कोशिका को संक्रमित करता है तो सिर्फ उसका अनुवांशिक पदार्थ ही कोशिका के अन्दर जाता है Capsid नही जाता है तो इस प्रक्रिया को फेजिक कहते है। और सबसे ज्यादा इसी प्रक्रिया से विषाणु गुणन करते है।

यह प्रक्रिया दो प्रकार का होता है।

  1. लाइसिस 
  2. लाइसोजैनी 

लाइसिस – 

जब विषाणु कोशिका को संक्रमित करता है तो कोशिका के अन्दर विषाणु का आनुवांशिक पदार्थ चला जाता है और यह आनुवांशिक पदार्थ कोशिका के आनुवांशिक पदार्थ को छोटे – छोटे टुकड़ो में तोड़कर उसे नष्ट कर देता है तो इस प्रक्रिया लाइसिस कहते है

अब उस कोशिका का आनुवांशिक पदार्थ तो नष्ट हो चूका है तो अब उसमे किसका आनुवांशिक पदार्थ बचा, विषाणु का, अब यह विषाणु का आनुवांशिक पदार्थ कोशिका के समस्त क्रिया विधि का नियंत्रण खुद करने लगेगा क्योकि कोशिका के सभी क्रिया विधि का नियंत्रण उसका आनुवांशिक पदार्थ ही करता है।

अब यह आनुवांशिक पदार्थ उस कोशिका के यांत्रिकी का उपयोग करके अपनी संख्या बढ़ाएगा कैसे बढ़ाएगा, सबसे पहले ये अपना जैसा प्रतिलिपि या Dublicate बनायेंगे जिसे Replication कहा जाता है उसके बाद आनुवांशिक पदार्थ का आधा संख्या RNA बनाएगा और RNA प्रोटीन बनाएगा और यह प्रोटीन विषाणु का आवरण या Capsid बनाएगा अब इस आवरण के अन्दर आधे बचे हुए आनुवांशिक पदार्थ चले जायेंगे जिससे यह पूर्ण रूप से विषाणु बन जायेंगे।

इस तरह जब ढेर सारे विषाणु एक कोशिका के अन्दर बन जायेंगे और उस कोशिका के अन्दर जगह नही रह जाएगी तो वह कोशिका फट जाएगी और सभी विषाणु बाहर आ जायेंगे और ये विषाणु फिर किसी कोशिका के अन्दर जायेंगे और अपना गुणन करेंगे जिससे विषाणु की संख्या बढ़ती जाएगी तो यह प्रक्रिया बार – बार चलती रहेगी। 

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लाइसोजैनी –

इसमें भी विषाणु किसी कोशिका को संक्रमित करेगा और उसका आनुवांशिक पदार्थ कोशिका के अन्दर जायेगा अब विषाणु का आनुवांशिक पदार्थ कोशिका के आनुवांशिक पदार्थ से जा करके जुड़ जायेगा अब ये अपनी जैसी प्रतिलिपि बनायेंगे अब इस प्रतिलिपि में  कोशिका और विषाणु दोनों के आनुवांशिक पदार्थ है।

अब इनमे से आधे प्रतिलिपि या आनुवांशिक पदार्थ प्रोटीन आवरण बनायेंगे और इस आवरण के अन्दर बचे हुए आनुवांशिक पदार्थ चले जायेंगे जिसके फलस्वरूप ये पूर्णरूप से विषाणु बन जायेंगे लेकिन इन विषाणुओं के अन्दर कोशिका और विषाणु दोनों के आनुवांशिक पदार्थ होंगे और जब ढेर सारे हो जायेंगे तो कोशिका फट जाएगी और ये बाहर आ जायेंगे। तो इस प्रक्रिया को फाइलोजैनी कहा जाता है।

पीनोसाईटिक –

इसमें जब विषाणु कोशिका को संक्रमित करता है तो पूरा विषाणु उस कोशिका के अन्दर चला जाता है। इस प्रक्रिया को पीनोसाईटिक कहते है।

VIROIDS किसे कहते है?

Viroids संक्रमणशील कण है जो एकल रज्जुकी RNA से बने होते है। जो सिर्फ पादपो में रोग उत्पन्न करते है।

PRIONS किसे कहते है?

Prions सबसे छोटे संक्रमणशील कण है जो सिर्फ प्रोटीन से बने है। ये जन्तुओ और पादपो दोनों में रोग उत्पन्न करते है ये तंत्रिका तंत्र का अपघटन कर देते है। इससे होने वाले रोग – Kuru, Mad Cow disease etc.  

मनुष्य में विषाणु जनित दो रोगों के नाम लिखिए।

Ans – पहला इन्फ्लुएंजा यह बीमारी Influenza virus से होता है और दूसरा रैबीज नामक बीमारी Rabies virus से होता है, जो कुत्ता या बन्दर के कटने से होता है।  

विषाणु से होने वाले रोग –

विषाणु से बहुत से रोग होते है जैसे – एड्स, चेचक, पोलियो, इंफ्लूएंजा, डेंगू बुखार, रेबीज, स्माल पॉक्स, measles, मम्प्स, ट्रेकोमा, हेपेटाइटिस इत्यादि।     

एड्स रोग किस विषाणु द्वारा होता है?

AIDS एक विषाणु से होने वाला रोग है AIDS का Full Form या पूरा नाम Acquire Immune Deficiency Syndrome होता है। यह बीमारी HIV (Human Immunodeficiency Virus) विषाणु से होता है।

दोस्तों आशा करता हूँ कि विषाणु क्या है? (What is Virus in Hindi?) के बारे में दी गयी जानकारी आपको पसंद आयी होगी। दोस्तों यदि आपकी इच्छा हो तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर कर सकते है जिससे उन्हें भी इस पोस्ट का लाभ मिल सके।

धन्यवाद

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