तिलचट्टा | वर्गीकरण, Morphology, Anatomy, Scientific name,

नमस्कार दोस्तों, इस आर्टिकल में आपको कॉकरोच के बाह्य आकारिकी, आंतरिक आकारिकी, वर्गीकरण, पाचन तंत्र, श्वसन तंत्र आदि के बारे में कम्पलीट जानकारी मिलेगी तो चलिए शुरू करते है।

तिलचट्टा क्या होता है? (What is Cockroach in Hindi?)

तिलचट्टा एक कीट है जो पूरी दुनिया में पाया जाता है। यह सर्वाहारी होता है। रात्रिचर होते है। ये किचेन, होटल, बेकरी, रेस्तरां, गोदामों, सीवेज और सार्वजनिक स्थानों में काफी ज्यादा रहते हैं। यही नही ये अपने साथ हैजा, डायरिया, तपेदिक और टाइफाइड जैसे विभिन्न हानिकारक जीवाणु और कीटाणुओं को ले जाते हैं, इसलिए ये वेक्टर या वाहक” के रूप में जाने जाते हैं।

ये तो कॉकरोच की कुछ बेसिक जानकारी थी अब हम इसके वर्गीकरण के बारे में जानेगे।

तिलचट्टा का वर्गीकरण (Classification of Cockroach in Hindi) –

PhylumArthropoda
ClassInsecta
OrderOrthoptera
GenusPeriplaneta
Speciesamericana

तिलचट्टा क्या होता है?

अब जान लेते है कि तिलचट्टा या कॉकरोच का बैज्ञानिक नाम क्या है।

तिलचट्टा का वैज्ञानिक नाम

तिलचट्टा का बैज्ञानिक नाम Periplaneta americana किसी भी जीव का बैज्ञानिक नाम उसके जीनस और स्पीशीज के नाम को एक साथ लिया जाता है या होता है।

सबसे पहले हम तिलचट्टे के वर्गीकरण के बारे में बात कर लेते है।

तिलचट्टा को संघ आर्थोपोडा में रखा गया है। संघ आर्थोपोडा का मुख्यरूप से दो लक्षण है। पहला इस संघ के जन्तुओ में संयुक्त उपांग पाए जाते है, और दूसरा इस संघ के जन्तुओ का बाहरी कंकाल काईटिन (Chitin) का बना होता है।

अब बात करते है इसके क्लास के बारे में, तो कॉकरोच को Class – Insecta में रखा गया है, और इन्सेक्टा का अर्थ कीट होता है। अर्थात् इस वर्ग में कीटो को रखा गया है। इस क्लास का मुख्य लक्षण यह है कि इस वर्ग के जन्तुओ में 3 जोड़ी पैर (legs) पायी जाती है। यानि की 6 पैर पाए जाते है। इसलिए इन्हें Hexapoda कहते है।

अब हम तिलचट्टे के बाह्य आकारिकी (Morphology) के बारे में अध्यन करेंगे।

तिलचट्टा का बाह्य आकारिकी (Morphology of Cockroach) –

तिलचट्टा भूरे रंग का होता है।

इसका बहिकंकाल काईटिन का बना होता है यह मैंने आपको पहले ही बता दिया है कि सभी आर्थोपोड्स का बहिकंकाल काईटिन का बना होता है।

कॉकरोच का शरीर खंडित होता है और प्रत्येक खंड जो काईटिन का बहिकंकाल है। उसे Sclerites कहते है।

कॉकरोच का जो पृष्ठीय भाग होता है या ऊपरी भाग होता है उसे Tergites कहते है, और अधरीय भाग या निचला भाग वाले Sclerites को Sternites कहते है। और ये दोनों भाग आपस में एक झिल्ली द्वारा जुड़े होते है। जिसे arthroidal झिल्ली कहते है। और पार्श्व भाग के Sclerites को Pleurites भी कहते है।

कॉकरोच के शरीर को कितने भागो में बांटा गया है?

कॉकरोच के शरीर 3 भागो में बांटा गया है।

  1. सिर (Head)
  2. वक्ष (Thorax)
  3. उदर (Abdomen)

सिर (Head) –

इनका सिर भ्रूणीय अवस्था में 6 खंड होता है और ये 6 खंड मिलकर वयस्क में एक सिर बनता है। इनका सिर त्रिकोणीय (Triangular) होता है। और यह मुख्य अक्ष के लम्बवत होता है यानि कि 90 डिग्री पर होता है। और इस अवस्था को Hypognathus कहा जाता है।

इनके सिर में उपांग भी पाए जाते है और इस उपांग में एक जोड़ी Antennae होती है जो स्पर्श और घ्राण संवेदी (सूंघना) होता है। यह भोजन को खोजने का कार्य करता है, एक जोड़ी संयुक्त नेत्र (Compound eye) भी होती है।

संयुक्त नेत्र का अर्थ है कि इनका जो नेत्र है वह कई इकाइयों से मिलकर बना होता है और इन्ही इकाइयों में चित्र का एक – एक भाग बनता है और ये एक – एक भाग मिलकर एक पूरा चित्र बनाते है। और इस एक इकाई को ommatidia कहते है। इसी सिर में इनके मुखांग (Mouth parts) होते है।

मुखांग (Mouth parts) –

इनका मुख काटने और चबाने के प्रकार के होते है। जिसे Mandibular प्रकार कहते है। इनके मुख में एक जोड़ी उपरी जबड़ा (Maxillae) होता है। और एक जोड़ी निचला जबड़ा (mandible) होता है। इनके उपरी होठ को labrum और निचले होठ को labium कहते है। और इनमे एक अधोजिव्हा (hypopharynx) होता है जो जीभ का काम करता है।

वक्ष (Thorax) – 

इनका वक्ष भ्रूणीय अवस्था में 3 खंड होता है और वयस्क होने पर भी तीन ही खंड रहता है।

  1. Pro-thorax
  2. Meso-thorax 
  3. Meta-thorax

इन तीनो खंडो में एक – एक जोड़े पैर होते है यानि की तीन जोड़े पैर होते है। इनके पैर का सबसे चौड़ा भाग Coxa होता है और सबसे लम्बा भाग Tibia होता है।

कॉकरोच में दो जोड़े पंख होते है। पहला जोड़ी mesothorax से निकला होता है। जिसे अग्रपंख (fore-wings) कहते है। यह हल्का काले भूरे रंग का और लेदरी होता है। यह उड़ने में सहायता नही करता है। आराम करने के दौरान यह सिर्फ दूसरी पंख को ढकने का काम करता है। या सुरक्षा प्रदान करता है।

दूसरा जोड़ी पंख meta-thorax से निकला होता है इसे पश्च पंख (Hind-wings) कहते है। यह वास्तविक और उड़ने का कार्य करता है। यह पंख झिल्लीनुमा और पारदर्शी होता है।

उदर (Abdomen) –

इनका उदर भ्रूणीय अवस्था में 11 खंड होता है और वयस्क होने पर 10 खंड हो जाता  है। लेकिन मादा कॉकरोच में 7 खंड स्पष्ट दिखाई देते है और नर में 9 खंड स्पष्ट दिखाई देते है। मादा कॉकरोच में 7 वां अधरीय खंड (sternite) boat के आकार का होता है।

और 8 वां और 9 वां sternite के साथ मिलकर जनन कोष (Genital pouch) का निर्माण करता है। इस जनन कोष में मादा छिद्र (gonophore), spermatheca छिद्र और collaterial ग्रंथिया मिलती है। 

कॉकरोच एकलिंगी (unisexual) होते है यानि कि नर और मादा अलग – अलग होते है। नर और मादा को आकारिकी के आधार पर विभेदित कर सकते है इस लक्षण को लैंगिक द्विरूपता (Sexual dimorphism) कहते है। नॉर्मली देखकर आप कैसे जान पाएंगे कि नर है कि मादा है।

नर कॉकरोच चपटे होते है और इसके 9 वे sternite खंड पर एक जोड़ी Anal style होती है जबकि मादा थोडा फूली होती है और इनमें Anal styles नही होती है।

कॉकरोच के 10 वे Tergite खंड पर एक जोड़े Anal cerci उपस्थित होता है जो कंपन के प्रति संवेदी होते है। यह नर और मादा दोनों में उपस्थित होता है।

अब हम कॉकरोच के तंत्र के बारे में पढ़ेंगे –

आंतरिक संरचना (Anatomy)

तिलचट्टा का पाचन तंत्र (Digestive system of cockroach in hindi) –

इनका पाचन तंत्र तीन भागो में विभाजित है।

  1. Fore-gut (अग्र आंत)
  2. Mid-gut (मध्य आंत)
  3. Hind-gut (पश्च आंत)
Digestive system of cockroach
image credit – Bankofbiology.com

Fore-gut –

यह cuticle से स्तरित होता है। इसके अंतर्गत मुख, ग्रसनी, लारग्रंथिया, ग्रसिका, क्रॉप और गिजार्ड आते है। इसमें क्रॉप जो होता है वह भोजन का संचय करता है और गिजार्ड में काईटिननुमा दांत होते है जो भोजन को पीसने का काम करता है।

Mid-gut  –

Fore-gut और mid-gut के बीच में 6-8 अन्धनाल होती है जो पाचक एंजाइम को स्रावित करती है। इसे hepatic caecae कहते है।

Hind-gut –

यह भी cuticle से स्तरित होता है। और यह mid-gut से चौड़ी होती है। यह ileum, colon और rectum में विभेदित होती है जो गुदा से बाहर खुलती है। Mid-gut और hind-gut के बीच में 100 – 150 Malphigian नलिकाए होती है जो उत्सर्जन का कार्य करती है। 

कॉकरोच का परिसंचरण तंत्र (Blood vascular system of cockroach) –

परिसंचरण तंत्र (Blood vascular system)-

कॉकरोच में परिसंचरण तंत्र खुले प्रकार का होता है। खुले प्रकार का मतलब यह है कि इनमे रुधिर वाहिकाए नही होगी या अल्प विकसित होगी। इसका मतलब खुले क्षेत्रो में प्रवाहित होता है। इनका ह्रदय न्युरोजेनिक होता है।

न्यूरोजेनिक का मतलब इनका ह्रदय स्वयं उत्तेजित नही हो सकता है उत्तेजित करने के लिए ह्रदय में आवेग या सूचना तंत्रिका तंत्र से आता है। इसलिए इसे Neurogenic कहा जाता है। इनका ह्रदय अलरी पेशियों से जुड़ा होता है और इनमे 13 संकुचनशील खंड होते है, जबकि सभी कशेरुकियो का ह्रदय मायोजेनिक होता है यानि कि यह स्वयं उत्तेजित हो जाते है।

circular system of cockroach
image credit – Bankofbiology.com

कॉकरोच के रुधिर को haemolymph कहते है क्योकि इनका रक्त रंगहीन होता है। रंगहीन इसलिए होता है क्योकि इनके रक्त में श्वसन वर्णक नही होते है। जैसे – हीमोग्लोबिन, हीमोसाइनिन आदि नही होते है, और  इनकी कोशिकाए Heamatocytes कहलाते है।

इनके रुधिर में श्वसन वर्णक न होने के कारण वह गैसों के परिवहन में कार्य नही करता है। केवल पोषण प्रदान करने में काम करेगा।

तिलचट्टा का श्वसन तंत्र (Respiratory system of cockroach) –

कॉकरोच में श्वसन करने के लिए श्वसन अंग होते है। जिसे Tracheal tubes कहा जाता है। ये ट्रैकिया छोटे – छोटे शाखाओ में विभाजित होते है जिसे Tracheoles कहते है, और यही Tracheoles डायरेक्ट ऑक्सीजन को ऊतकों तक पहुचाते है।

और ये Tracheal tubes बाहर की तरफ खुलती है। इन छिद्रों को Spiracles कहते है। इन छिद्रों की संख्या 10 जोड़ी होती है 2 जोड़ी वक्ष भाग में होती है और 8 जोड़ी उदर भाग में होती है, और ये सभी छिद्र पार्श्व भाग में होती है। और इन spiracles का नियमन Sphincter पेशिया करती है। 

SPIRACLES → TRACHEA → TRACHEOLES → TISSUES

तिलचट्टा का उत्सर्जन तंत्र (Excretory system of cockroach in hindi) –

ये कीट वर्ग अपने उत्सर्जन में अपशिष्ट पदार्थ यूरिक अम्ल निकालते है इसलिए इन्हें Uricotelic कहते है। कॉकरोच का मुख्य उत्सर्जी संरचना Malphigian नलिकाए होती है। और इन नालिकाओ में ग्रंथिल उपकला और इसके साथ – साथ ciliated कोशिकाए होती है। 

ये Malphigian नलिकाए नाइट्रोजन अपशिष्ट पदार्थो को यूरिक अम्ल में परिवर्तित करती है और यह पश्च आंत (Hind-gut) या गुदा से बाहर निकल जाती है।

इतना ही नहीं इसमें और भी उत्सर्जी संरचनाये होती है। जो निम्नलिखित है।

  • Fat body
  • Nephrocytes
  • Urecose ग्रंथियाँ 

कॉकरोच का तंत्रिका तंत्र (Nervous system cockroach in hindi) –

कॉकरोच में दो ठोस तंत्रिका रज्जु (Nerve cord) अधरीय भाग (Ventral part) में होता है। और यह सबसे ज्यादा वक्ष और उदर में होता है। वक्ष क्षेत्र में तीन जोड़े Ganglia और उदर में लगभग 6 जोड़े Ganglia होते है। इसलिए इनके सिर को काट देने पर भी 7-10 दिनों तक जीवित रहते है।

इनके सिर में दो प्रकार के तंत्रिका वलय (Nerve ring) पाए जाते है।

  1. Supra-oesophageal ganglia – यह Antennae, नेत्र और Labrum में जाता है।
  2. Sub-besophageal ganglia – यह maxillae, mandible और labium में जाता है।

तिलचट्टा का जनन तंत्र (Reproductive system of cockroach in hindi) –

तो दोस्तों सबसे पहले हम नर जनन तंत्र के बारे में पढ़ेंगे।

नर जनन तंत्र (Male Reproductive system) –

इनके शरीर के 4th, 5th और 6th खंड में एक जोड़े वृषण होते है। इन वृषण से शुक्रवाहिका निकलकर Mushroom या युट्रीक्यूल ग्रंथि में खुलती है। यह ग्रंथि 6-7 वें उदरीय खंड में उपस्थित होता है। इस ग्रंथि के अन्दर शुक्राशय और लम्बी व छोटी नलिकाए होती है। मशरुम ग्रंथि से ऊपर की ओर एक और ग्रंथि जुडी होती है जिसका नाम Phallic या conglobate ग्रंथि होती है।

Male Reproductive system of cockroach
image credit – Bankofbiology.com

मशरुम ग्रंथि से नीचे की ओर एक स्खलन नलिका निकली होती है जो बहिजनांग (Phalomere) में खुलती है। 

नर कॉकरोच में सहायक जनन ग्रंथियां phallic और mushroom ग्रंथि होती है, ये दोनों शुक्राणु को packets के रूप में परिवर्तित करते है मतलव सभी शुक्राणु एक दूसरे से चिपक कर पैकेट्स के रूप में व्यवस्थित होते है। इसे Spermatophores कहते है।

तिलचट्टा के मादा जनन तंत्र का वर्णन करें?

मादा जनन तंत्र (Female Reproductive system) –

मादा में 2-6 वे खंड में एक जोड़ी अंडाशय होती है, और प्रत्येक अंडाशय में 8 Ovarian नलिकाए होती है, और अंडाशय से अंडवाहिनियाँ निकली होती है। इनके छठवे खंड में spematheca होता है जो शुक्राणुओं को अस्थाई रूप से संग्रहित करता है।

female Reproductive system of cockroach
image credit – Bankofbiology.com

इसके ऊपर योनि उपस्थित होता है, और इसके नीचे जनन कक्ष और जनन कक्ष के नीचे vestibulum उपस्थित होता है। जनन कक्ष और vestibulum को मिलाकर Genital chamber कहते है। यह 7, 8, और 9 वे खंड में होता है। इसमें सहायक जनन ग्रंथिया collaterial ग्रंथिया होती है। 

इसमें निषेचन की प्रक्रिया Genital chamber में होता है यानि कि आंतरिक निषेचन होता है। अब निषेचन के बाद जो निषेचित अंडे होते है उन पर कैप्सूल का एक आवरण होता है जिसे Ootheca कहा जाता है। और कैप्सूल के आवरण का निर्माण collaterial ग्रंथियों के द्वारा होता है।

मादा कॉकरोच एक बार में 9-10 Ootheca बनाती है और प्रत्येक ootheca में 14 से 16 निषेचित अंडे होती है।

कॉकरोच में विकास (Development) –

इनका विकास Paurametabolus (अपूर्ण) प्रकार का होता है। अपूर्ण का मतलब इनका जो लार्वा है जिसे Nymph कहते है यह वयस्क के सामान होता है। एडल्ट के सभी लक्षण इसमें होते है इनमे सिर्फ पंख नही होते है जबकि वयस्क में पंख होते है। ये 13 निर्मोचन (Moultings) के बाद एडल्ट बनते है। 

तिलचट्टे की कई प्रजातियां जंगली होती हैं। 4,600 में से लगभग 30 प्रजातियां मानव आवास से जुड़ी हैं।

डिप्लोप्टेरा पंक्टाटा, कॉकरोच अपने पैदा हुए बच्चों को खिलाने के लिए पोषक रूप से घने क्रिस्टलीय दूध” का उत्पादन करता है। यह म्यांमार, चीन, फिजी, हवाई और भारत में पाया जाता है। वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि कॉकरोच का दूध भविष्य का सुपरफूड हो सकता है।

तिलचट्टा के बारे में कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1 – तिलचट्टा के हृदय में कितने कक्ष होते हैं?

उत्तर – तिलचट्टा के ह्रदय में कुल 13 कक्ष या चैम्बर होते है।

प्रश्न 2 – तिलचट्टा कितनी देर तक सांस रोक सकता है?

उत्तर – तिलचट्टा 45 मिनट तक साँस रोक सकता है।

नीचे दिए गए सभी प्रश्नों के उत्तर के लिए आर्टिकल को पूरा पढ़िये।

तिलचट्टा के कितने पैर होते हैं?

तिलचट्टा में श्वसन अंग का क्या नाम है

तिलचट्टा के शरीर में वायु कैसे प्रवेश करती है?

तिलचट्टा क्या खाता है?

दोस्तों आशा करता हूँ कि आपको तिलचट्टा (Cockroach in Hindi) के बारे में दी गई जानकारी पसंद आई होगी। दोस्तों यदि यह दी गई जानकारी पसंद आई है तो प्लीज इसे अधिक से अधिक शेयर कीजिये।

धन्यवाद

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