जीवाणु क्या है? कम्पलीट नोट्स, Simple भाषा में

नमस्कार दोस्तों, क्या आप बैक्टीरिया या जीवाणु के बारे में जानना चाहते है यदि हाँ तो आप बिलकुल सही पोस्ट पर आये है। आज हम आपको बैक्टीरिया क्या है? (What is bacteria in hindi) इसके बारे स्टेप बाई स्टेप बताएँगे तो चलिए शुरू करते है।

जीवाणु किसे कहते है? What is Bacteria in hindi?

जीवाणु एक सूक्ष्मऔर एकल कोशिकीय जीव है। इन जीवाणुओ को मोनेरा जगत में रखा गया है और इस जगत में प्रोकैरियोटिक कोशिका और एकल कोशिकीय जीव रखे गए है। लेकिन इस मोनेरा जगत को बैज्ञानिक कार्ल वूज ने दो अलग – अलग जगत में बाँट दिया है।

एक आर्कीबैक्टीरिया जगत और दूसरा यूबैक्टीरिया जगत। आर्कीबैक्टीरिया जगत में आर्कीजीवाणुओं को रखा गया है और यूबैक्टीरिया में जीवाणुओं को रखा गया है।

इस आर्टिकल में हम यूबैक्टीरिया या बैक्टीरिया के बारे में पढ़ेंगे आर्कीजीवाणुओं के बारे में हम किसी दूसरे आर्टिकल में विस्तृत रूप से पढ़ेंगे।

सबसे छोटी जीवाणु Dialister pneumosintes है जिसकी लम्बाई 0.15 से 0.3 माइक्रोन होती है, और सबसे बड़ी जीवाणु Spirillum volutans है इसकी लम्बाई 13 से 15 माइक्रोन होता है।

बैक्टीरिया किसे कहते है
बैक्टीरिया किसे कहते है

जीवाणु कितने प्रकार के होते हैं? (How many types of bacteria in hindi?)

जीवाणु चार प्रकार के होते हैं। 

  1. दंडाकार (बेसिलस) – यह डंडे के आकार का होता है इसलिए इसे दंडाकार जीवाणु कहते है।
  2. गोलाकार (कोकस) – यह गोलाकार होते है।
  3. कोशाकर (विब्रो) – यह कॉमा आकार के होते है।
  4. सर्पिल (स्पाइलर) – यह सांपो के आकार के होते है।

अब हम जीवाणु कोशिका के बारे में पढ़ेंगे। कोशिका में सबसे पहले कोशिका हम कोशिका आवरण के बारे में पढ़ेंगे।

कोशिका आवरण किसे कहते है?

जीवों की कोशिका चारो ओर से कुछ स्तरों से घिरी होती है जिसे कोशिका आवरण कहा जाता है।

जीवाणुओ का कोशिका आवरण तीन स्तरों से घिरा होता है।

  1. ग्लाईकोकैलिक्स (Glycocalyx)
  2. कोशिका भित्ति (Cell Wall)
  3. प्लाज्मा झिल्ली (Plasma membrane)

सबसे पहला आवरण glycocalyx होता है तो सबसे पहले हम इसी के बारे में पढ़ेंगे।

Glycocalyx –

यह सबसे बहरी स्तर होता है, और यह Polysaccharides से बना होता है। जीवाणुओं में यह दो तरह का मिलता है या तो यह कठोर मिलेगा या कोमल मिलेगा अगर यह कठोर मिलता है तो उसे सम्पुटिका (Capsule) कहते है यदि कोमल मिलाता है तो उसे अवपंक परत (Slime layer) कहते है।

कार्य (Function) –

Glycocalyx का पहला कार्य कोशिका को सुरक्षा प्रदान करना यानि कि कोशिका को फटने से बचाता है और दूसरा कार्य संक्रमण फैलाना यानि कि रोगों को फैलाना।

कोशिका भित्ति (Cell wall) –

जीवाणु की कोशिका भित्ति कठोर होती है, और यह कोशिका की संरचना को बनाये रखती है। कोशिका भित्ति Peptidoglycans से बनी होती है। Peptidoglycans प्रोटीन और शर्करा से मिलकर बना होता है। ये प्रोटीन तीन अमीनो अम्ल से बने होते है, Alannine, Glutamic acid और Lysine, और शर्करा दो प्रकार की होती है। एक N – Acetyl Glucose amine (NAG) और दूसरा N – Acetyl Muramic acid (NAM) है।

अब इस कोशिका भित्ति के आधार पर जीवाणुओं को दो भागो में बांटा गया है। आर्कीजीवाणु और यूजीवाणु।

सतह उपांग –

जीवाणु के सतह पर तीन उपांग मिलते है।

  1. कशाभिका (Flagella)
  2. रोम (Pili)
  3. झालर (Fimbriae)

कशाभिका किसे कहते है? (What is flagella in hindi) –

जीवाणुओं में जो पूछ की जैसी संरचना बाहर निकली होती है उसे कशाभिका कहते है। कशाभिका तीन भागो से मिलकर बना होता है। आधारीय काय, हुक और तंतु (Filament)। आधारीय काय में 4 रिंग (केवल ग्राम नेगेटिव जीवाणु में, ग्राम पॉजिटिव में 2 रिंग मिलते है) मिलते है। L – ring, P – ring, S – ring और M – ring, L और P रिंग कोशिका भित्ति में मिलते है और S और M रिंग प्लाज्मा झिल्ली में मिलते है। इसके बाद हुक होता है और हुक से तंतु निकला होता है। जीवाणु इसी कशाभिका से गति करते है।

रोम किसे कहते है? (What is Pili in hindi) –

यह एक जीवाणु को दूसरे जीवाणु से जोड़ता है जिससे एक जीवाणु का आनुवंशिक पदार्थ दूसरे जीवाणु में चला जाता है। इसे जीन पुनर्सयोजन कहते है। एक रोम को Pilus कहते है और ढेर सारे रोम को Pili कहते है।

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झालर क्या होता है? (What is Fimbriae in hindi?) –

झालर रोम के जैसी होती है लेकिन यह रोम से थोड़ी सी बड़ी होती है। यह जीवाणु को ठोस पदार्थ से चिपकाने का कार्य करता है।

प्लाज्मा झिल्ली किसे कहते है? (What is Plasma membrane in hindi) –

प्लाज्मा झिल्ली दो पदार्थो लिपिड और प्रोटीन से मिलकर बनी होती है। यूबैक्टीरिया में लिपिड के दो लेयर होते है जबकि आर्कीबैक्टीरिया में एक लेयर होता है। यह झिल्ली कोशका द्रव्य को प्रोटेक्ट करता है और प्लाज्मा झिल्ली जीवाणुओं में अन्दर की तरफ मुड़कर एक संरचना बनाती है जिसे मीसोसोम (Mesosome) कहते है।

यह मीसोसोम माइटोकांड्रिया के समान कार्य करता है यानि कि ऊर्जा का निर्माण करता है क्योकि जीवाणुओ में माइटोकांड्रिया या कोई भी झिल्लीयुक्त कोशिकांग नही पाया जाता है। मीसोसोम कोशिका को विभाजित करने में भी सहायता करता है।

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कोशिका द्रव्य किसे कहते है? (What is Cytoplasm in hindi)

कोशिका के अन्दर गाढ़ा तरल पदार्थ पाया जाता है जिसे कोशिका द्रव्य कहते है। प्रोकैरियोटिक कोशिका में कोशिका द्रव्य गति नही करता है। इसमें 70S प्रकार के राइबोसोम होते है जो प्रोटीन का संश्लेषण करते है।

अब वो जीवाणु जो प्रकाश संश्लेषण करते है उनके कोशिका द्रव्य में एक संरचना मिलती है जिसे क्रोमेटोफोर कहते है और इस क्रोमेटोफोर के अन्दर मुख्यरूप से दो वर्णक पाए जाते है Bacteriochchlorophyll और Bacteriovirdin और ये दोनों प्रकाश संश्लेषण करने में सहायता करते है।  

केन्द्रकाभ (Nucleoid) –

आपको पता होगा कि प्रोकैरियोटिक कोशिका में सुविकसित केन्द्रक नही मिलते है। तो केन्द्रक न होने पर इसमें आनुवंशिक पदार्थ गोलाकार नग्न DNA होता है, नग्न का मतलब यह डीएनए हिस्टोन प्रोटीन से लिपटा नही होता है, और यह डीएनए जिस जगह पर होता है उस जगह को केन्द्रकाभ (Nucleoid) या Prochromosome या Genophhore कहा जाता है।

Plasmid किसे कहते है?

प्लाज्मिड शब्द वैज्ञानिक लेडरबर्ग और हेज ने दिया था। कोशिका द्रव्य में मुख्य आनुवांशिक पदार्थ या Nucleoid के अलावा एक और आनुवांशिक पदार्थ मिलता है जो गोलाकार, द्विरज्जुकी डीएनए होता है इसे ही प्लाज्मिड कहते है। ये प्लाज्मिड कई प्रकार के होते है जैसे –

  • F – Plasmid
  • R – Plasmid
  • Col – Plasmid
  • Ti – Plasmid

एपीसोम किसे कहते है?

जब प्लाज्मिड केन्द्रकाभ से जुड़ जाती है तो ऐसी संरचना को एपीसोम कहते है।

राइबोसोम –

जीवाणुओ में राइबोसोम 70S प्रकार का होता है। ये राइबोसोम दो इकाई से बना होता है पहला छोटी इकाई जो 30S प्रकार का होता है और दूसरा बड़ी इकाई जो 50S प्रकार का होता है। यह राइबोसोम प्रोटीन संश्लेषण का कार्य करता है।

यूबैक्टीरिया की जीवन शैली –

यूबैक्टीरिया की जीवन शैली में हम सबसे पहले श्वसन के बारे में पढ़ेंगे।

जीवाणुओं में श्वसन –

श्वसन –

ये श्वसन क्या होता है देखिये हम लोग ऑक्सीजन लेते है और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते है जिसके कारण हमारे शरीर में ऊर्जा का निर्माण होता है। इसी प्रक्रिया को श्वसन कहते है।

श्वसन कितने प्रकार के होते है?

श्वसन दो प्रकार के होते है।

  1. वायुवीय श्वसन
  2. अवायुवीय श्वसन

अब बात आती है कि जीवाणु किस तरह का श्वसन करते है। तो जीवाणु जो है वह दोनों प्रकार का श्वसन करते है।

वायुवीय श्वसन किसे कहते है? What is Aerobic respiration in hindi?

ऐसा श्वसन जिसमे ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है उसे वायुवीय श्वसन कहते है। हम लोग जो श्वसन करते है वह वायुवीय श्वसन है। यह श्वसन भी दो प्रकार का होता है।

  1. बाध्य वायुवीय श्वसन
  2. ऐच्छिक वायुवीय श्वसन

बाध्य वायुवीय श्वसन – वह श्वसन जिसमे सिर्फ और सिर्फ वायुवीय श्वसन होता है उसे बाध्य वायुवीय श्वसन कहते है मतलब जिसमे जीवाणु वायुवीय श्वसन करने के लिए बधा हो उसे हम बाध्य वायुवीय श्वसन कहते है।

जैसे – Bacillus subtilis जीवाणु यह वह जीवाणु है जो सिर्फ वायुवीय श्वसन करता है।

ऐच्छिक वायुवीय श्वसन – जब सामान्य रूप से अवायुवीय श्वसन करने वाले जीवाणु अचानक ऑक्सीजन उपस्थित होने पर अपने इच्छानुसार वायुवीय श्वसन भी कर ले तो ऐसे वायुवीय श्वसन को ऐच्छिक वायुवीय श्वसन कहते है।

उदाहरण – क्लोरोबियम जीवाणु।

अवायुवीय श्वसन किसे कहते है? What is anaerobic respiration in hindi?

ऐसा श्वसन जिसमे ऑक्सीजन की आवश्यकता नही होती है। अवायुवीय श्वसन कहलाता है।

यह भी दो प्रकार का होता है।

  1. बाध्य अवायुवीय श्वसन
  2. ऐच्छिक अवायुवीय श्वसन

बाध्य अवायुवीय श्वसन – जब जीवाणु सिर्फ और सिर्फ अवायुवीय श्वसन करता है तो उसे बाध्य अवायुवीय श्वसन कहते है।

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उदाहरण – Clostridium batulinum जीवाणु।

ऐच्छिक अवायुवीय श्वसन – जब सामान्य रूप से वायुवीय श्वसन करने वाले जीवाणु ऑक्सीजन अनुपस्थित होने पर भी अपने इच्छानुसार अवायुवीय श्वसन भी कर लेते है तो ऐसे अवायुवीय श्वसन को ऐच्छिक अवायुवीय श्वसन कहते है।

उदाहरण – Pseudomonas जीवाणु

NEET या दूसरे बोर्ड Exams के लिए कम्पलीट नोट्स बुक –

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जीवाणुओं में पोषण किस प्रकार होता है?

जीवाणुओं में पोषण किस प्रकार होता है यह जानने से पहले पोषण क्या होता है इसे जान लेते है।

पोषण –

जो पदार्थ खाने पीने से जीवो को उर्जा मिलती है या उन्हें फायदा होता है तो उसे हम पोषण कहते है। सभी जीव पोषण करते है और पोषण के आधार पर जीवाणु दो प्रकार के होते है।

  1. स्वपोषी जीवाणु
  2. परपोषी जीवाणु

स्वपोषी जीवाणु किसे कहते है? What is autotrophic bacteria in hindi?

वह जीवाणु जो अपना भोजन स्वयं बनाते है, जो दूसरे जीवो पर निर्भर नही होते है, स्वपोषी जीवाणु कहलाते है। यह भी दो प्रकार के होते है।

  1. प्रकाश संश्लेषी जीवाणु
  2. रासायनिक संश्लेषी जीवाणु

प्रकाश संश्लेषी जीवाणु किसे कहते है?

जो जीवाणु प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण करके अपना भोजन स्वयं बनाते है प्रकाश संश्लेषी कहलाते है। अब ये जीवाणु प्रकाश संश्लेषण कर रहे है तो इनके अन्दर क्या मिलेगा वर्णक और इस वर्णक का नाम Bacteriocchlorophyll है।

उदाहरण – Chromatium, Rhodospirillum, Chlorobium आदि।

रासायनिक संश्लेषी जीवाणु किसे कहते है?

वो जीवाणु जो अकार्बनिक पदार्थो का ऑक्सीकरण कराके उसमे से निकली ऊष्मा को अवशोषित या संचित कर लेते है और उस ऊष्मा का उपयोग करके भोजन का निर्माण करते है तो ऐसे जीवाणुओं को रासायनिक संश्लेषी कहते है।

उदाहरण – Nitrosomonas, Nitrobaater आदि

परपोषी जीवाणु किसे कहते है? What is heterotrophic bacteria in hindi?

जो जीवाणु अपना भोजन स्वयं नही बनाते है और दूसरों पर निर्भर होते है परपोषी जीवाणु कहलाते है। यह तीन प्रकार के होते है।

  1. मृतोपजीवी 
  2. सहजीवी
  3. परजीवी जीवाणु

मृतोपजीवी किसे कहते है? What is Saprotrophic in hindi?

वह जीवाणु जो सड़े – गले या मृत पदार्थो से पोषण प्राप्त करते है उन्हें मृतोपजीवी कहते है।

सहजीवी किसे कहते है? What is symbioticin hindi?

जब दो जीव आपस में एक दूसरे की सहायता करते है तो ऐसे जीवो को सहजीवी कहा जाता है। जैसे राइजोबियम जीवाणु और लेग्युम पादप ये दोनों एक दूसरे का सहयता करते है कैसे करते है राइजोबियम जीवाणु नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करके लेग्युम पादप को नाइट्रोजन प्रदान करता है और लेग्युम पादप राइजोबियम जीवाणु को आवास और पोषण प्रदान कर देता है इस तरह दोनों एक दूसरे की सहायता करते है।

परजीवी किसे कहते है? What is parasite in hindi?

वह जीव जो दूसरे जीवो पर भोजन और आवास के लिए आश्रित होता है उसे परजीवी कहते है। और ये परजीवी अपने पोषक को नुकसान पहुचाते है। या जिन जीवाणुओं से रोग होंगे वो ज्यादातर परजीवी होंगे।  

जीवाणुओ में प्रजनन (Reproduction in Bacteria in hindi) –

जीवाणुओं में जनन दो प्रकार का होता है।

  1. अलैंगिक जनन (Asexual reproduction)
  2. लैंगिक जनन (Sexual reproduction)

अलैंगिक जनन (Asexual reproduction) –

जीवाणुओं में अलैंगिक प्रजनन तीन प्रकार का होता है।

  1. द्विखंडन (Binary fission)
  2. अन्तः बीजाणु (Endospores)
  3. चल बीजाणु (Zoospores)

द्विविखंडन (Binary Fission) –

इस विखंडन में एक जीव बराबर – बराबर  दो अलग – अलग कोशिकाओ में बट जाती है इसमें होता क्या है कि पहले जीव का जेनेटिक मैटेरिअल दो भागो में बट जाता है उसके बाद वह दो अलग – अलग कोशिकाओ में विभाजित हो जाता है और हर एक भाग एक वयस्क जीव के रूप में तेजी के साथ ग्रो या वृद्धि कर जाता है इसी को बाइनरी विखंडन कहते है।

अन्तः बीजाणु (Endospores) –

इस में जब जीव प्रतिकूल परिस्थिति में आ जाता है तो वह खुद को सुरक्षित करने के लिए लेयर्स बनाते है और उसके अन्दर बहु विखंडन करते है मतलब केन्द्रक का बहुत बार विभाजन करते है इन्हें स्पोर भी कहते है और ये स्पोर कोशिका बन जाते है उसके बाद अनुकूल परिस्थिति होने पर लेयर्स टूट जाता है और सभी कोशिकाए बाहर आ जाते है।

चल बीजाणु (Zoospores) –

ये भी अन्तः बीजाणु की तरह प्रतिकूल परस्थितियों में होता है बस इसमें जो नए कोशिका बनते है उनमे कशाभिका होता है जो चलने में सहायता करता है इसलिए इन्हें चलबीजाणु कहते है।

लैंगिक जनन (Sexual reproduction) –

पहले के बैज्ञानिक का कहना था कि जीवाणुओं में लैंगिक प्रजनन नहीं पाया जाता है लेकिन वैज्ञानिक लेडरबर्ग और टैटम सन 1946 में यह सिद्ध किया की जीवाणुओं में लैंगिक प्रजनन होता है जिसके लिए इन्हें नोबल प्राइस भी मिला है।

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लैंगिक प्रजनन तीन प्रकार का होता है।

संयुग्मन (Conjugation) –  

इस प्रजनन को सन 1944 में लीडरबर्ग और टैटम ने खोजा था इसी को इन्होने लैंगिक प्रजनन कहा था। इन्होने ई० कोलाई नामक जीवाणु में देखा था। इस प्रजनन में दो जीवाणु दाता कोशिका और ग्राही कोशिका आपस में चिपक जाते है। दाता कोशिका वह कोशिका या जीवाणु होती है जिनमे F+ कारक पाया जाता है और यह कारक आनुवांशिक पदार्थ होता है। जिनमे F+ कारक नही पाया जाता है उन्हें ग्राही या F- कोशिका कहा जाता है।

जब ये दो कोशिका आपस में चिपक जाते है तो इनके कोशिका के बीच एक नलिका बन जाती है जिसे संयुग्मन नलिका कहते है। अब दाता कोशिका के अन्दर F+ कारक Replication करता है जिसके फलस्वरूप एक और F+ कारक बन जाता है अब यह कारक नलिका द्वारा ग्राही कोशिका के अन्दर स्थानांतरित हो जाता है जिसके फलस्वरूप F- कोशिका, F+ कोशिका बन जाती है इसी को संयुग्मन कहते है।

या

जब दो कोशिकाए आपस में चिपकती है तो एक कोशिका से दूसरी कोशिका में आनुवांशिक पदार्थ का चला जाना संयुग्मन कहलाता है।

रूपांतरण (Transformation) –

इस प्रजनन को सबसे वैज्ञानिक ग्रिफिथ ने सन 1928 में खोजा था इन्होने डिप्लोकोकस न्यूमोनाई नामक जीवाणु में देखा था। इसमें क्या होता है कि जो जीवाणु कोशिका होती है। वह अपने आस पास से फॉरेन डीएनए को अपने अन्दर प्रवेश करा लेती है जिस वजह से इस जीवाणु कोशिका के जीनोटाइप और फिनोटाइप में परिवर्तन होता है। जीनोटाइप मतलब इनके जीन में और फीनोटाइप मतलब इनके फिजिकल या बाह्य संरचना में परिवर्तन होता है यानि कि जीवाणु कोशिका का रूपांतरण हो जाता है।

पारक्रमण (Transduction) –

इस प्रजनन के बारे में बैज्ञानिक जिंडर और लीडरबर्ग ने सन 1952 में बताया था। इन्होने सालमोनेलाटाइफी जीवाणु पर प्रयोग किया था। इस जनन में जीवाणु कोशिका में वायरस (जीवाणुभक्षी) द्वारा किसी दूसरे जीवाणु का डीएनए चला जाता है।  

जीवाणुओ से लाभ –

  1. जीवाणुओं द्वारा नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करके अमोनिया या अमोनियम आयन में बदलना।
  2. Lactobacilus जीवाणु द्वारा दूध से दही बनाना।
  3. Propionibacterium जीवाणु द्वारा स्विस चीज का बनाना।
  4. हमारे आंत में उपस्थित E – coli जीवाणु द्वारा विटामिन B और विटामिन k निर्माण करना।
  5. प्रतिजैविक (Antibiotic) यह शब्द Waksman ने दिया था इन्होने एक प्रतिजैविक खोजा था जिसका नाम Streptomycin है। यह एंटीबायोटिक एक जीवाणु से प्राप्त की गई थी जिसका नाम Streptomyces griseus है।

जीवाणुओं से घातक प्रभाव –

जीवाणु से हमें घातक रोग होते है। नीचे जीवाणु और उनसे होने वाले रोग का नाम दिया गया है।

Name of causal organismName of the human diseases
Clostridium botulinumFood poisoning
Vibrio choleraeCholera
Corynebacterium diptheriaeDiphtheria
Salmonella typhiTyphoid
Mycobacterium tuberculosisTuberculosis
Mycobacterium lepraeLeprosy
Diplococcus pneumoniaePneumonia
Clostridium tetaniTetanus
Treponema pallidumSyphilis
Yersinia pestisPlague
ग्राम धनात्मक और ग्राम ऋणात्मक जीवाणु किसे कहते है?

एक वैज्ञानिक थे जिनका नाम था Christian gram इन्होने एक विधि का उपयोग किया जिसका नाम क्या रखा गया ग्राम अभिरंजन। 

इन्होने दो बीकर लिए और दोनों बीकरो में अलग – अलग प्रकार के जीवाणुओं को डाल दिया। उसके बाद सबसे पहले इनके ऊपर एक डाई (रंग) डाला और उस डाई का नाम था क्रिस्टल वायलेट। अब यह डाई इन दोनों के ऊपर क्या चढ़ा देगी रंग मतलब अभिरंजन कर देगी इसका मतलब रंग चढ़ जाना। 

उसके बाद इन दोनों प्रकार के जीवाणुओं को धो दिया पहले पानी से फिर एल्कोहल से।

उसके बाद इन्होने देखा कि एक प्रकार के जीवाणुओं पर रंग चढ़ा रह गया और दूसरे प्रकार के जीवाणुओं का रंग उतर गया। 

अब जिनपर रंग चढ़ा रह गया उन्हें ग्राम धनात्मक (Gram positive) कहा गया और जिनपर से रंग उतर गया उन्हें ग्राम ऋणात्मक (Gram negative) कहा गया। 

अब यहाँ एक प्रश्न उठता है कि ग्राम पॉजिटिव जीवाणुओं पर रंग चढ़ा क्यों रह गया और ग्राम नेगेटिव जीवाणुओं से रंग उतर क्यों गया?

ग्राम नेगेटिव जीवाणु जो थे उनके कोशिका भित्ति में लिपिड (तेल या वसा) अधिक मात्रा में थी जिस वजह से धुलने के बाद रंग उतर गया जबकि ग्राम पॉजिटिव जीवाणुओं के कोशिका भित्ति में लिपिड या तेल या वसा बहुत कम मात्रा में मिल रही थी जिस वजह से इन पर रंग चढ़ा रह गया। 

जीवाणुओं से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न –

जीवाणु की खोज किसने की?

एण्टनी वाँन ल्यूवोनहूक ( सन 1676 ई० में )

जीवाणु से होने वाले रोग – ऊपर टेबल में दिया गया है।

जीवाणु की संरचना का चित्र – शुरू में दिया गया है।

दूध को दही में बदलने वाले जीवाणु का नाम लिखो

Lactobacilus

जीवाणु की संरचना एवं प्रजनन का वर्णन कीजिए

इसका उत्तर आर्टिकल में दिया गया है

क्षय रोग किस जीवाणु से फैलता है?

Mycobacterium tuberculosis

जीवाणु में किस प्रकार का डीएनए पाया जाता है?

गोलाकार, द्विरज्जुकी, नग्न डीएनए पाया जाता है

सबसे छोटा जीवाणु कौन सा है?

Dialister pneumosintes

नाइट्रोजन स्थिरीकरण किस जीवाणु के द्वारा किया जाता है?

राइजोबियम जीवाणु द्वारा

दोस्तों आशा करता हूँ कि बैक्टीरिया क्या है? के बारे में दी गई जानकारी पसंद आई होगी। यदि यह पोस्ट आपको पसंद आया है तो इसे आप अपने दोस्तों के साथ शेयर कर सकते है जिससे उन्हें भी इसका लाभ मिल सके।

धन्यवाद

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