माइकोप्लाज्मा क्या है? संरचना, लक्षण, माप, चित्र

दोस्तों आज के इस लेख में हम माइकोप्लाज्मा (Mycoplasma) के बारे में जानेंगे जैसे माइकोप्लाज्मा क्या है, इसका आकार कितना है, यह किस जगत का जीव है। ऐसे कई प्रश्नों के उत्तर हम इस आर्टिकल में जानेंगे तो चलिए बिना समय बर्बाद किये शुरू करते हैं।

माइकोप्लाज्मा क्या है? What is Mycoplasma in Hindi?

माइकोप्लाज्मा सबसे छोटा जीव है और यह सबसे छोटी कोशिका भी है यह एकमात्र मोनेरा जगत का जीव है जिसमें कोशिका भित्ति नहीं होती है। इनमें कोशिका भित्ति ना होने के कारण इनका आकार बदलता रहता है क्योंकि कोशिका भित्ति जो है वह कोशिका के आकार को बनाए रखती है और ऐसे जीव जिनका आकार बदलता रहता है उन्हें प्लीओमार्फिक कहा जाता है।

अब आपके दिमाग में एक प्रश्न उठ रहा होगा की जंतु कोशिका में कोशिका भित्ति नहीं होती है तो इनका भी आकार बदलना चाहिए जबकि इनका आकार नहीं बदलता है। इनका आकार इसलिए नहीं बदलता है क्योंकि इनकी कोशिका में कोशिका कंकाल पाया जाता है जो इनकी कोशिका के आकार को बनाए रखता है।

अब आप सोचेंगे कि क्या माइकोप्लाज्मा के अंदर कोशिका कंकाल नहीं होता है हाँ, इनके अंदर कोशिका कंकाल नहीं होता है। प्रोकैरियोटिक जीवों के अंदर कोशिका कंकाल नहीं पाया जाता है और इनका आकार जो है वह कोशिका भित्ति बनाए रखता है। इनको PPLO (Pleuropneumonia like Organisms प्लयूरो निमोनिया सम जीव) कहते हैं। PPLO मतलब ऐसे जीव जिनका आकार बदलता रहता है और जब रोग उत्पन्न करते हैं तो निमोनिया के जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

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ये अवायवीय परिस्थिति में भी जीवित रह सकते हैं यानी कि वायु के बिना भी रह सकते हैं।

इनसे जंतुओं और पादपो में रोग भी उत्पन्न होता है। मुख्य रूप से यह चारगाही जंतुओं में रोग उत्पन्न करते है और उनके लक्षण निमोनिया के जैसे होते हैं। पादपो में यह Witches broom और Little leaf of Brinjal नामक रोग उत्पन्न करते हैं।

माइकोप्लाज्मा का आकार

माइकोप्लाज्मा का आकार 0.1 माइक्रोमीटर से 0.15 माइक्रोमीटर होता है। दोस्तों माइकोप्लाज्मा बैक्टीरिया जैसे जीव है। इनमें कोशिका भित्ति और मीसोसोम नहीं पाया जाता है। यह आपको मैंने पहले ही बता दिया है।

माइकोप्लाज्मा की प्लाज्मा झिल्ली लगभग 75 एंगस्ट्रॉम मोटी होती है। दोस्तों इनके कोशिका द्रव्य में प्रोटीन संश्लेषण और शर्करा के अवायवीय विघटन द्वारा ATP का निर्माण होता है जिसमें एंजाइम शामिल होते हैं। इसमें DNA रिप्लिकेशन, ट्रांसक्रिप्शन और ट्रांसलेशन में जरूरी एंजाइम भी शामिल होते हैं। माइकोप्लाज्मा में केंद्रक नहीं होता है। दोस्तों इनके केंद्रीकीय क्षेत्र में डबल-स्ट्रैंडेड डीएनए अणु होते हैं, जो गोलाकार या फ़ाइब्रिल्स के रूप में हो सकते हैं।

सबसे छोटा पीपीएलओ Mycoplasma ladilawii लगभग 0.1 माइक्रोमीटर व्यास होता है।

माइकोप्लाज्मा क्या है
माइकोप्लाज्मा क्या है

निष्कर्ष

दोस्तों आशा करता हूँ कि माइकोप्लाज्मा क्या है के बारे में दी गयी जानकारी आपके लिए हेल्पफुल रही होगी और यदि आपको यह लेख पसंद आयी हो तो इसे शेयर कीजिये और कमेंट कीजिये।

धन्यवाद

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